रेलवे को बड़ा झटका, आमदनी में आई 4 हजार करोड़ की कमी

नई दिल्ली ( 20 अक्टूबर) : अपनी आमदनी के लिए चुनिंदा ट्रेनों में सर्ज प्राइजिंग लागू करने वाले भारतीय रेलवे को जोरदार झटका लगा है। भारतीय रेलवे के ताजा आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ छह माह में ही भारतीय रेलवे की आमदनी में लगभग चार हजार करोड़ रुपये की कमी आई है। आमतौर पर रेलवे की आमदनी टारगेट से कम होती रही है, लेकिन इस बार आमदनी पिछले साल से ही कम हो गई है। इस वजह से अब रेलवे को अपने पैसेंजर किरायों के सिस्टम में फिर से बदलाव करना पड़ सकता है।

भारतीय रेलवे ने कहा कि महत्वपूर्ण यह है कि सर्ज प्राइजिंग लागू होने के बाद भी आमदनी में कमी का दौर जारी है। हालत यह है कि बीते 10 दिन में ही रेलवे की आमदनी पिछले साल के 10 दिनों के मुकाबले लगभग सवा दो सौ करोड़ रुपये कम हो गई है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जिन आंकड़ों से रेलवे को झटका लगा है, वह इस साल एक अप्रैल से 10 अक्टूबर तक के हैं।

बीते साल इसी अवधि में रेलवे की कुल आमदनी 84 हजार 747 करोड़ रुपये थी, लेकिन इस साल उसी अवधि में यह आमदनी कम होकर 80 हजार 893 करोड़ रुपये रह गई। यानी की छह महीने में ही रेलवे की आमदनी 3853 करोड़ रुपये कम हो गई है। यह हालत तब है, जबकि रेलवे पर इसी साल ही नए वेतनमान का बोझ आया है। बीते साल एक से 10 अक्टूबर के बीच रेलवे की आमदनी 4304 करोड़ थी, जो इस साल एक से दस अक्टूबर के बीच कम होकर 4072 करोड़ रुपय रह गई है।

रेलवे के एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि आमतौर पर यह देखा जाता है कि रेलवे ने आमदनी का क्या टारगेट रखा था और वह कितना पूरा हुआ। लेकिन इस बार टारगेट के हिसाब से देखा जाए तो आमदनी में कमी का आंकड़ा लगभघ आठ हजार करोड़ रुपये है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक आमदनी में सबसे ज्यादा कमी माल ढुलाई के मामले में हुई है। माल ढुलाई से होने वाली आमदनी में ही रेलवे को लगभग साढ़े चार हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। हालांकि पैसेंजर आमदनी से कुछ भरपाई हुई लेकिन वह भी बेहद मामूली ही रही है।

...तो रेलवे का नुकसान बढ़ जाएगा  खबरों के अनुसार जिस तरह से आमदनी का ग्राफ गिरा है, उससे साफ है कि रेलवे का नुकसान बढ़ेगा। इसकी वजह यह है कि इसी साल ही रेलवे ने सातवें पे कमिशन की सिफारिशें लागू की हैं, जिससे रेलवे को लगभग 33 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा। इसी तरह से रेलवे का नुकसान बढ़ेगा। इंडियन रेलवे के सूत्रों का कहना है कि आमदनी में कमी की सबसे बड़ी वजह यह है कि माल ढुलाई के मामले में अब रेलवे पिछड़ रहा है।

कोयले की कम मूवमेंट की वजह से भी रेलवे को भारी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा दूसरी वजह यह है कि बीते कुछ सालों में रेलवे ने माल ढुलाई की दरों को लगातार बढ़ाया है, जिसकी वजह से रोड के मामले में रेलवे की माल ढुलाई महंगी हो गई है।