टूट सकती है 92 साल पुरानी परंपरा

नई दिल्ली(21 सितंबर): रेल बजट की 92 साल पुरानी परंपरा इतिहास के पन्नों में दर्ज हो सकती है। दरअसल रेल बजट को आम बजट का हिस्सा बनाया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो अगले साल रेल बजट पेश नहीं होगा।

- सूत्रों का कहना है कि इस मसले पर सरकार में आम सहमति बन चुकी है। कुछ मसलों पर अंतिम निर्णय होना बाकी है। सूत्रों के मुताबिक आज कैबिनेट की बैठक में इस ऐतिहासिक फैसले पर मुहर लग सकती है।

- 1924 से चली आ रही है रेल बजट की परंपरा

- सूत्रों का कहना है कि रेल मंत्रालय की मांग है की किराया, माल भाड़े में संशोधन और बाजार से उधारी लेने जैसे मामलो का अधिकार उसी के पास रहे। जिससे उनके अपने ऑपरेशनल साथ ही बाजार में बढ़ते कम्पटीशन के दौर पर बने रहने के लिए तुरंत फैसले लिए जा सकें। 

- रेल मंत्रालय को उम्मीद है कि आम बजट में विलय होने के बाद रेलवे को वित्तीय तौर पर आज़ादी मिल पाएगी। साथ में डीवीडेंड के नाम पर करीब 5 से 6 हजार करोड़ रुपये का बोझ नहीं होग। साथ ही वित्त मंत्रीलय के आगे ग्रास बजटरी सपोर्ट के लिए दरवाजा नहीं खटखटाना पड़ेगा। साथ में सातवें वेतन आयेग का बोझ उठाने में मंत्रालय सहयोग करेगा। जहॉ तक किराया बढ़ाने के अधिकार की बात है उस पर दोनों मंत्रालयों के बीच इस बात की सहमति है कि आगे किराये में संशोधन रेल टैरिफ अथॉरिटी के पास हो। इसके साथ ही रेलवे को नई परियोजाओं, रेलगाडिय़ों और विस्तार योजनाओं की घोषणा करने की पूरी छूट होगी।