''काले पैसे को गोरा करने की योजना लेकर आई है मोदी सरकार''

नई दिल्‍ली (2 मार्च): 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाषण दिया था कि मैं काले धन को खत्‍म कर दूंगा। लेकिन उनकी सरकार के वित्त मंत्री अरुण जेटली एक ऐसी योजना लेकर आए हैं, जिसमें कालाधन रखने वालों को पाक-साफ कर दिया जाएगा।

राहुल गांधी ने इस योजना को फेयर एंड लवली योजना का नाम देते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधाते हुए कहा कि इस योजना को अपनाने वालों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, यह सरकार काले पैसे को गोरा करने की योजना लेकर आई है। उन्‍होंने कहा कि अरुण जेटली ने कहा कि मेरे पास आएं और मैं सबको गोरा कर दूंगा। कांग्रेस उपाध्‍यक्ष ने सरकार के मैक इन इंडिया पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनके बब्‍बर शेर ने किसी को रोजगार नहीं दिया है।

राहुल गांधी के भाषण के मुख्‍य अंश:

रोहित वेमुल्‍ला ने सवाल उठाया और उसको दबाया गया तो उसने आत्‍महत्‍या कर ली। सवाल यह है कि हिंदुस्‍तान के एक युवा को ऐसे क्‍यों खत्‍म किया गया। पीएम ने उसकी मां को भी फोन नहीं किया।

जेएनयू में कन्‍हैया खड़ा होता है और 20 मिनट के भाषण में उसने भारत के खिलाफ कुछ गलत नहीं कहा। अगर वहां पर किसी ने देश के खिलाफ कुछ गलत कहा तो उसे अरेस्‍ट करें। जेएनयू में 60 फीसदी छात्र दलित और पिछड़े वर्ग से आते हैं।

बीजेपी पर वार करते हुए राहुल ने कहा कि आप सभी जानते हैं और कभी गलती नहीं करते लेकिन हम जनता की सुनते हैं और उसी से सीखते हैं। मैं आरएसएस का नहीं हूं और मुझसे गलती होती है।

इसी के साथ राहुल ने कहा कि हम गांधी को मानते हैं और आप सावरकर को।

जेएनयू की 40 फीसदी छात्रों के परिजनों की आमदनी 6 हजार रुपये से कम हैं। बीजेपी इन लोगों के लिए इसलिए पड़े हैं कि वह नहीं चाहती कि गरीब वर्ग कभी आगे नहीं बढ़े। आप ना जेएनयू को कुचल पाओगे और ना ही गरीब लोगों को।

हमारे धर्म में कहा लिखा है कि अध्‍यापकों और शिक्षकों को पीटा जाना चाहिए। जेएनयू के अध्‍यापकों को कोर्ट में मीडिया के सामने पीटा। मीडिया को भी मारा। जब मीडिया, छात्रों और अध्‍यापकों को मारा तो प्रधानमंत्री ने एक भी शब्‍द नहीं कहा।

प्रधानमंत्री मोदी बिना किसी सोच और समझ के नवाज शरीफ के साथ चाय पर चर्चा के लिए पाकिस्‍तान चले जाते हैं। प्रधानमंत्री ने बिना किसी को बताए इस तरह का कदम उठाया, जिसने हमारे तिरंगे और शहीदों को अपमानित किया है।

गरीबों की आवाज सुनो, किसानों की आवाज सुना और छात्रों की भी आवाज सरकार को सुननी चाहिए।

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