ब्लाॅग: 'राहुल गांधी से बौखला गई है बीजेपी'

नई दिल्ली (20 सितंबर): कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के अमेरिकी दौरे को लेकर तरह-तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं। दुनिया ग्लोबल हो गई है और भारी तादाद में भारतीय दुनियाभर में रहते रहे हैं, लिहाजा उनसे संवाद और बातचीत जरूरी है। इसी कड़ी में कांग्रेस उपाध्यक्ष ने प्रवासी भारतीयों से जुड़ने की जरूरत महसूस की और सैम पित्रोदा की अध्यक्षता में भारतीय प्रवासी कांग्रेस कमेटी का गठन किया। सैम पित्रोदा वही शख्स हैं जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ मिलकर देश में आईटी क्रांति लाए थे। 

भारत के प्रति वैश्विक आकांक्षाओं को राहुल गांधी पूरा करना चाहते हैं। उनका सपना है कि अपने देश में रोजगार सृजन, उद्यमशीलता, रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएं। और उन्होंने अपने अमेरिका यात्रा के दौरान बर्कले में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में भी इसी पर जोर दिया। राहुल गांधी ने अपने 'इंडिया एट 70' के संदेश में इस पर खासा जोर भी दिया। उन्होंने कहा कि भारत विकास के एक ऐसे मोड़ पर है जहां अब विफलता विकल्प नहीं है। विकास के मामले में दुनिया भारत की ओर देख रहा है, ऐसे में अगर भारत विफल होता है तो ये पूरी दुनिया को हिला देगा। भारत के विकास की रफ्तार शांति, भाईचारे, अहिंसा और सहिष्णुता के मूल भारतीय दर्शन के साथ ही आगे ही बढ़ सकती है। 

अमेरिका के बर्कले में राहुल गांधी का ये संवाद कांग्रेस पार्टी के भविष्य की दिशा और दशा को दर्शता है। कांग्रेस पार्टी इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर बीजेपी सरकार के खिलाफ 2019 के चुनाव में लोगों के बीच जाएगी। दुनिया में भारत के बढ़ते वर्चस्व के हर आर्थिक मापदंडों पर बीजेपी सरकार असफल रही है। जीडीपी में गिरावट, आईआईपी को कम करने, निर्यात घटने, सीएडी का अंतर बढ़ना। नोटबंदी भारतीय अर्थव्यस्था के लिए घातक कदम साबित हुई। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त पड़ी और भारी तादाद में लोग बेरोजगार हुए। इन समस्याओं को गलत तरीके से जीएसटी के क्रियांवयन ने और गंभीर कर दिया। जीएसटी की वजह से कर प्रणाली और अधिक जटिल हो गई है। मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया जैसे कार्यक्रम भी लोगों में आत्मविश्वास नहीं जगा पाए और ये सरकार के लिए महज मार्केटिंग प्रोप साबित हुआ। बढ़ती बेरोजगारी इस समय देश की सबसे बड़ी समस्या बन गई है।   वो कहते हैं कि नंबर कभी झूठ नहीं बोलता और ये संकेत साफ बताते हैं कि देश में कैसे बीजेपी सरकार असफल रही है। श्रम ब्यूरो का आंकड़ा बताता है कि नौकरी सृजन 8 वर्षों में सबसे कम रहा है। देश में निजी निवेश भी घटा है। पिछले 3 साल में ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन यानी जीएफसीएफ 2016-17 में सबसे कम 26.9 फीसदी रहा, जो 14 साल में सबसे कम है। जहां बड़े पैमाने पर नौकरियां है वो मध्यम उद्यम भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मध्यम उद्यमों में आउटस्टेंडिंग क्रेडिट जुलाई 2015 में 1,19, 268 करोड़ रुपये से घटकर जुलाई 2017 में 1,00,542 करोड़ रुपए हो गया जो 16 फीसदी कम है।

मुद्रास्फीति यानी महंगाई दर अगस्त में 3.36 फीसदी के साथ 5 महीने के अपने उच्चतम स्तर पर है। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) एक साल पहले की तुलना में 3.24 फीसदी के साथ 4 महीने के उच्चतम स्तर पर है। पेट्रोल और डीजल के दाम आम लोगों की कमर तोड़ रहे हैं। 3.5 साल में पेट्रोल और डीजल पर 11 बार केंद्रीय उत्पाद शुल्क बढ़ाया गया है। यह 133.47 फीसदी से बढ़कर 400.86 फीसदी हो गया है। जो आम लोगों के लिए सबसे घातक साबित हुआ है।

अगर कोई इन आर्थिक संकेतकों और बढ़ती असहिष्णुता को जोड़े तो साफ जाहिर होगा कि राजनीतिक लाभ के लिए देश में किस तरह से नफरत को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे देश अपनी पूरी क्षमता से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इस समय हम ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहां पूरा विश्व सबसे बड़े लोकतंत्र की ओर आर्थिक विकास के लिए ध्यान से देख रहा है। ऐसे में हमें अपने आर्थिक विकास के पथ से नहीं भटकना चाहिए, लेकिन मौजूदा सरकार ऐसा करने में पूरी तरह से विफल रही है। दुनिया के सामने हमने इसे पहले भी साबित किया और अब भी साबित कर सकते हैं, लेकिन हमें इसके लिए राहुल गांधी के बर्कले में दिए गए भाषण को याद रखना होगा। 'सभी लोग भारत के बारे में कहते हैं कि मानव के इतिहास में ऐसा कोई लोकतांत्रिक देश नहीं है जिसने इतने बड़े पैमाने पर लोगों को गरीबी से बाहर निकाला, जितना भारत ने निकाला है। मैं जोर देकर कहता हूं कि ऐसा कभी नहीं हुआ है और हमने ऐसा हिंसा के साथ नहीं किया, हमने ऐसा लोगों को मारकर नहीं किया, हमने इसे शांति पूर्वक एक साथ मिलकर किया है।'

इसलिए मुझे ये आश्चर्यचकित नहीं किया जब बीजेपी अध्यक्ष, उनके कैबिनेट के मंत्री, प्रवक्ता और उनके तमाम सहयोगियों ने कांग्रेस उपाध्यक्ष के भाषण पर इस तरह हमला किया। सच्चाई जब विश्वास और साहस के साथ कही जाती है तो हमेशा दर्द होता है। राहुल गांधी के भाषण पर बीजेपी की प्रतिक्रिया उसी को बयां कर रही है।

(ये कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी के निजी विचार हैं)