कौल ब्राह्मण हैं राहुल गांधी, नाना जवाहरलाल इसलिए लगाते थे नेहरू, देखें पूरी वंशावली...

न्यूज 24 ब्यूरो,नई दिल्ली (25 नवंबर): राहुल गांधी पुष्‍कर मंदिर में पूजा करने पहुंचे तो उन्होंने यहां पर बताया कि वह कौल (कश्मीरी) ब्राह्मण हैं और दत्तात्रेय उनका गोत्र है। हालांकि राहुल गांधी के नाना जवाहर लाल नेहरू के दादा अपने नाम के बाद कौल लगाते थे, उनका नाम गंगाधर था और वह जब भी अपना पूरा नाम लिखते थे तो गंगाधर कौल ही लिखते थे।

जवाहरलाल और उनके पिता मोतीलाल अपने नाम के पीछे कौल ना लगाकर नेहरू लगाते थे। इसके पीछे बड़ी दिलचस्प कहानी है।  कहा जाता है कि नहर के किनारे रहने की वजह से जवाहरलाल नेहरू के दादा गंगाधर कौल व परदादा लक्ष्मी नारायण को नेहरू टाइटल दिया गया था।

ये है राहुल गांधी के परिवार की वंशावली...पंडित राज कौलविश्वनाथ कौलसाहबराम, मंशाराम, टीकाराममंशारामलक्ष्मीनारायण (नहर के किनारे बसने के कारण उन्हें नेहरू की उपाधि दी गई थी)गंगाधर (कोतवाल)वंशीधर, नंदलाल, मोतीलाल नेहरूजवाहरलाल नेहरूइंदिरा गांधीराजीव गांधी, संजय गांधीराहुल गांधी, वरूण गांधी

नेहरू-गांधी परिवार के ग्यारह पीढ़ियों के रिकॉर्ड के अनुसार, सबसे पहले पंडित नेहरू से छह पीढ़ी ऊपर के पंडित राज कौल का नाम आता है। राज कौल के बेटे विश्वनाथ कौल थे। विश्वनाथ कौल के तीन बेटों में सबसे बड़े साहबराम थे, बीच के मंशाराम जबकि सबसे छोटे टीकाराम थे।

साहबराम के वंशज अम्बाला में रहते हैं, जबकि दूसरे नंबर के मंशाराम का परिवार आज देश के सबसे ताकतर सियासी परिवारों में गिना जाता है। मंशाराम के बेटे लक्ष्मीनारायण थे। लक्ष्मीनारायण ही परिवार के दूसरे लोगों से अलग होकर नहर किनारे बसे थे। लक्ष्मीनारायण के बेटे गंगाधर अंग्रेजों के जमाने में कोतवाल थे और उनकी काफी हनक मानी जाती थी।

नहर के किनारे बसने की वजह से लक्ष्मी नारायण को नेहरू उपनाम दिया गया था, जो बाद में इंदिरा गांधी तक पीढ़ी दर पीढ़ी इस्तेमाल होता चला गया था। गंगाधर कौल नेहरू के तीन बेटे थे। सबसे बड़े वंशीधर, बीच के नंदलाल और सबसे छोटे मोतीलाल नेहरू थे। नंदलाल और मोतीलाल की उम्र में काफी फर्क था। कश्मीर से दिल्ली और दिल्ली से आगरा के बाद गंगाधर के परिवार में सबसे पहले दूसरे नंबर के नंदलाल इलाहाबाद शिफ्ट हुए थे।

मोतीलाल नेहरू के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, उनकी बेटी इंदिरा, फिर उनके दोनों बेटों संजय व राजीव और उसके बाद की मौजूदा पीढ़ियों का भी जिक्र है। दस्तावेज के मुताबिक कौल परिवार अब से करीब तीन सौ बरस पहले 1716 में तत्कालीन शाही खानदान के राजकुमार फरुखशियर के साथ दिल्ली आ गया था।

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