मोदी की इस डील ने उड़ाई चीन-पाकिस्‍तान की नींद

नई दिल्‍ली (26 जनवरी): फ्रांस ने गणतंत्र दिवस से पहले भारत को एक ऐसा तोहफे दिया जिसका इंतजार कई सालों से किया जा रहा था। लड़ाकू विमान राफेल की डील लगभग पक्की हो गई है। यह जानकारी खुद फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसवा ओलांद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी है। राफेल दुनिया के सबसे घातक लड़ाकू विमानों में से एक है। भारत फ्रांस से 36 लड़ाकू विमान खरीदेगा और ये डील करीब 60 हजार करोड़ रुपए की है।

रक्षा मंत्रालय ने यूपीए सरकार के दौरान 31 जनवरी 2012 को राफेल को चुने जाने की घोषणा की थी। भारतीय वायु सेना ने कड़े मूल्यांकन के बाद दुनिया के छह जांबाज लड़ाकू विमानों में से यूरोफाइटर टाइफून और फ्रांस के विमान राफेल पर मुहर लगाई थी, लेकिन कीमत को लेकर ये डील फंस गई। राफेल को बनाने वाली कंपनी ने सौदा होने से ऐन पहले कीमत बढ़ा दी। साल 2007 में इसकी कीमत 10 बिलियन डॉलर आंकी गयी थी, जो बाद में 15 अरब डॉलर तक पहुंच गयी। जिस कारण ये डील फंस गई।

राफेल जितना जरूरी भारत के लिए है, उतनी ही जरूरत फ्रांस की भी है। इस डील से फ्रांस को एक राफेल विमान का करीब 10 करोड़ यूरो यानी करीब 750 करोड़ रुपए मिलेगा, जो फ्रांस की बिगड़ती आर्थिक स्थिति के लिए काफी बेहतर होगा। मौजूदा श्रेणी के फाइटर प्‍लेन में राफेल का जवाब न तो चीन के पास है और न ही पाकिस्तान के पास, ऐसे में मोदी और ओलांद के बीच हुई इस डील ने चीन-पाकिस्‍तान की नींद उड़ा दी हैं।

राफेल का मतलब: राफेल एक फ्रेंच शब्द है, जिसका मतलब होता है तूफ़ान।

राफेल की ताकत: इस विमान का जैसा नाम है वैसा ही इसका काम है। यह दुश्मन को मिनटों में खाक कर देता है। राफेल में हवा से हवा में मारने वाली 6 मिसाइलें लगाई जा सकती हैं। राफेल का निशाना इतना अचूक है कि ये 55 हजार फीट की ऊंचाई से भी पूरी एक्यूरेसी के साथ बम गिरा सकता है। सीरिया में फ्रांस इसी राफेल से ISIS के आतंकियों पर बम गिरा रहा है।

राफेल जब हथियारों से लैस होकर दुश्मन की ओर बढ़ेगा तो हिंदुस्तान की ताकत एकाएक दोगुनी-तीगुनी बढ़ जाएगी। दुश्मनों के बीच खौफ के दूसरे नाम राफेल को ऊंचाई वाले इलाकों में लड़ने में महारत हासिल है। पलक झपकते ही हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच छिपे दुश्मन को ये खत्म कर देगा। सिर्फ एक मिनट में 60 हजार फुट तक की ऊंचाई पर ये पहुंच सकता है राफेल। घंटे भर में ही 2200 से 2500 किलोमीटर दूर दुश्मन को निपटाने के लिए पहुंच सकता है।

ये 2130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। इस हिसाब से देखें तो राफेल इस्लामाबाद और बीजिंग में बमबारी कर चार घंटे के अंदर नई दिल्‍ली वापस आ सकता है। इस्लामाबाद की नई दिल्‍ली से दूरी करीब 691 किलोमीटर है, जबकि बीजिंग की दूरी 3230 किमी। राफेल इस्‍लामाबाद जाकर 40 मिनट में लौट सकता है, जबकि बीजिंग की दूरी तय करने में उसे सिर्फ तीन घंटे लगेंगे।

राफेल में हवा से हवा में मार करने वाली 6 मिसाइलें होती हैं। दोनों पंखों में दो दो मिसाइल फिट की जा सकती हैं। वहीं दो मिसाइल इसके नीचे के हिस्से में लगी होती हैं। ये 3700 किलोमीटर की रेडियस में हमला कर सकता है। इसकी ईंधन क्षमता 4700 किलोग्राम है।

खबरों के मुताबिक भारतीय सेना इन मिसाइलों की जगह दुनिया की सबसे तेज़ ब्रम्होस मिसाइल फिट करने की तैयारी कर रही है, जो राफेल की ताकत कई गुना बढ़ा देगा और इसे दुनिया का सबसे का ताकतवर हथियार बना देगी। क्योंकि दुनिया के किसी भी देश के पास ब्रम्होस मिसाइल की काट नहीं हैं। भारत में निर्मित इस मिसाइल को दुनिया की सबसे तेज़ मिसाइल माना जाता है। राफेल में 1.30 एमएम की गन लगी होती है जो एक बार में 125 राउंड फायर कर सकती है।

राफेल की खासियत: राफेल की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये दूसरे लड़ाकू विमानों की तुलना में लंबाई चौड़ाई में काफी कम और भार में भी काफी हल्का। दो शक्तिशाली इंजन वाले राफेल विमान की लम्बाई महज 15.27 मीटर है जबकि इसकी चौड़ाई 10.80 मीटर है। इसका कुल वजन बगैर हथियारों के 10 हजार तीन सौ किलोग्राम है और हथियार के साथ 15 हज़ार किलोग्राम है। दो शक्तिशाली इंजन वाला आसमान का ये तूफान किसी भी मौसम में काम कर सकता है। खराब से खराब मौसम में उड़ान भरने पर हवा से हवा औऱ हवा से जमीन पर हमला करने की काबिलियत रखता है।