जानें राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा, CIJ रंजन गोगई की इन बातों से मोदी सरकार को राहत

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (14 दिसंबर): राफेल डील मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी पूरी तरह से कांग्रेस पर हमलावर हो गई है। हालांकि कांग्रेस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने राफ़ेल घोटाले में जहाज़ की क़ीमत, प्रक्रिया में गड़बड़ीं व मापदंडों से छेड़छाड़ की जांच को अदालत के दायरे में नहीं आते की बात कही है। इस बारे में बीजेपी की तरफ से जो कुछ कहा जा रहा है, वह सिर्फ जनता को भ्रमित करने वाला है। इसलिए कांग्रेस ने इस मामले में जेपीसी की जांच कराने की बात कही है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उसे राफेल डील में कोई अनियमितता नजर नहीं आई है। सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील को देश की जरूरत बताते हुए इसके खिलाफ सारी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने देश में पिछले दिनों राजनीतिक तूफान की वजह बने राफेल डील पर अपना फैसला सुनाया।

CIJ रंजन गोगोई की बेंच ने क्या-क्या कहा...

- कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया था कि उन्होंने यूपीए की तुलना में तीन गुना अधिक कीमत देकर राफेल विमान का सौदा किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत पर निर्णय लेना अदालत का काम नहीं है। हमें फ्रांस से 36 राफेल विमानों की खरीद की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नजर नहीं आता है।

- राफेल डील को लेकर कांग्रेस और विपक्ष का यह भी आरोप था कि यूपीए के दौरान 126 फाइटर जेट खरीदने का सौदा रहा था। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि अब मोदी सरकार केवल 36 फाइटर जेट खरीद रही है। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सरकार को 126 या 36 विमान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है।

- इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में माना है कि भारतीय वायुसेना में राफेल की तरह के चौथी और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को शामिल करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'लड़ाकू विमानों की जरूरत है और देश लड़ाकू विमानों के बगैर नहीं रह सकता है।' सर्वोच्च अदालत ने इस बिंदु का भी उल्लेख किया कि सितंबर 2016 में जब राफेल सौदे को अंतिम रूप दिया गया था, उस वक्त किसी ने खरीदी पर सवाल नहीं उठाया था।

- सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा कि राफेल सौदे पर सवाल उस वक्त उठे जब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसवा ओलांद ने बयान दिया, यह न्यायिक समीक्षा का आधार नहीं हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई अवसर नहीं है।