राफेल डील की जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, 5 घंटे चली सुनवाई

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली ( 14 नवंबर ): सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीद सौदे की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाओं पर बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान सभी संबंधित पक्षों की तरफ से अपनी-अपनी दलीलें पेश की गईं। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं और सरकार के साथ-साथ वायुसेना अधिकारियों से भी विस्तार से उनका पक्ष सुना। करीब 5 घंटे लंबी मैराथन सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

हालांकि राफेल की कीमत को सार्वजनिक करने की मांग कर रहे याचिकाकर्ताओं को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब कोर्ट ने कहा कि जबतक हम खुद सार्वजनिक नहीं करें, तब तक इस पर कोई चर्चा नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट के कहने पर एयरफोर्स के बड़े अफसर अदालत में पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट के जजों ने एयरफोर्स के अधिकारियों से कई सवाल पूछे। सुप्रीम कोर्ट ने वायुसेना अधिकारियों से सवाल-जवाब के बाद उन्हें कोर्ट से जाने की इजाजत दे दी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा वायुसेना अधिकारियों को तलब किए जाने के बाद एक एयर मार्शल और 4 वाइस एयरमार्शल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।

इस दौरान सरकारी और सौदे की जांच की मांग कर रहे याचिकाकर्ताओं के वकीलों के बीच तीखीं दलीलें चलीं। पहले याचिकाकर्ताओं की तरफ से दलीलें पेश की गईं, जिसके बाद सरकार की तरफ से पक्ष रखा गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वायुसेना के अधिकारी को भी बयान के लिए कोर्ट में बुला लिया गया।

सरकार की तरफ से अटर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वायुसेना की फौरी जरूरतों को पूरा करने के लिए राफेल जेट जरूरी थे। उन्होंने कहा कि वायुसेना को राफेल जेट की तत्काल जरूरत है। अटर्नी जनरल ने कोर्ट से कहा कि करगिल की लड़ाई में हमने अपने कई जवानों को खोया। उन्होंने कहा कि अगर उस दौरान हमारे पास राफेल एयरक्राफ्ट रहे होते तो नुकसान कम हुआ होता। इस पर वायुसेना ने भी वेणुगोपाल की दलीलों से सहमति जताई।

अटर्नी जनरल ने बताया कि दसॉ ने सरकार को ऑफसेट पार्टनरों की जानकारी नहीं दी है। उन्होंने कहा कि ऑफसेट पार्टनरों को दसॉ ने चुना, सरकार का इसमें कोई हाथ नहीं है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में यह स्वीकार किया कि फ्रांस की सरकार ने 36 विमानों की कोई गारंटी नहीं दी है लेकिन प्रधानमंत्री ने लेटर ऑफ कम्फर्ट जरूर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद एक अहम निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस पूरे मामले में भारतीय वायुसेना का पक्ष भी सुने जाने की जरूरत है। सीजेआई रंजन गोगोई ने एजी केके वेणुगोपाल से पूछा कि क्या कोर्ट में एयरफोर्स का भी कोई ऑफिसर मौजूद है, जो इससे जुड़े मामलों पर जवाब दे सके? क्योंकि हम सब एयरफोर्स से जुड़े मामले पर ही चर्चा कर रहे हैं, इस मुद्दे पर हम एयरफोर्स से भी कुछ सवाल पूछना चाहते हैं। इसके बाद वायुसेना के अधिकारी कोर्ट में पेश हुए। रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव भी कोर्ट में पहुंचे।


सुप्रीम कोर्ट में रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव भी मौजूद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनसे 2015 के ऑफसेट नियमों के बारे में पूछा। रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव ने कोर्ट को ऑफसेट नियमों की जानकारी दी और कहा कि वर्तमान में मुख्य कॉन्ट्रैक्ट के साथ ही ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट भी होता है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि 2015 में ऑफसेट नियमों में बदलाव क्यों किया गया। इसमें देशहित क्या है? अगर ऑफसेट पार्टनर प्रोडक्शन नहीं करते तो क्या किया जाएगा?

सुप्रीम कोर्ट ने राफेल की कीमत को सार्वजनिक करने की मांग कर रहे याचिकाकर्ताओं को झटका दिया। कोर्ट ने साफ किया कि सरकार ने राफेल की कीमतों पर सीलबंद लिफाफे में जो जानकारी सौंपी है, उस पर चर्चा तभी होगी, जब कोर्ट खुद उसे सार्वजनिक करेगा। सुनवाई के दौरान एजी ने कहा, 'यह मामला इतना गोपनीय है कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया सीलबंद लिफाफा मैंने भी नहीं देखा है।' इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राफेल की कीमत के बारे में याचिकाकर्ताओं को अभी कोई जानकारी न दी जाए। जब तक सुप्रीम कोर्ट इजाजत न दे, तब तक इस पर चर्चा भी नहीं होनी चाहिए।