प्रेम सिंह चंदूमाजरा का बड़ा बयान, बोले- राफेल से जुड़ी रिपोर्ट PAC के पास नहीं आई

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (14 दिसंबर): पीएसी के सदस्य और अकाली सांसद  प्रेम सिंह चंदू माजरा ने भी राफेल पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राफेल से संबंधित कोई भी रिपोर्ट पीएसी के पास नहीं आई है। उन्होंने कहा कि राफेल अभी तक कोई कागजात कैग तक भी नहीं पहुंचे हैं।

वहीं इससे पहले आज राफेल डील के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि राफेल विमानों की खरीद पर कोर्ट दखल नहीं दे सकता। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को सौदे की प्रक्रिया में क्लीन चिट देते हुए कहा कि विमानों की खरीद को लेकर भी कोर्ट दबाव नहीं बना सकता। 

देश के प्रधान न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई ने कहा, 'पसंद का ऑफसेट पार्टनर चुने जाने में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है, और व्यक्तिगत सोच के आधार पर रक्षा खरीद जैसे संवेदनशील मामलों में जांच नहीं करवाई जा सकती। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से मोदी सरकार को भारी राहत पहुंची है।

CIJ रंजन गोगोई की बेंच ने क्या-क्या कहा...

- कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया था कि उन्होंने यूपीए की तुलना में तीन गुना अधिक कीमत देकर राफेल विमान का सौदा किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत पर निर्णय लेना अदालत का काम नहीं है। हमें फ्रांस से 36 राफेल विमानों की खरीद की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नजर नहीं आता है।

- राफेल डील को लेकर कांग्रेस और विपक्ष का यह भी आरोप था कि यूपीए के दौरान 126 फाइटर जेट खरीदने का सौदा रहा था। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि अब मोदी सरकार केवल 36 फाइटर जेट खरीद रही है। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सरकार को 126 या 36 विमान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है।

- इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में माना है कि भारतीय वायुसेना में राफेल की तरह के चौथी और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को शामिल करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'लड़ाकू विमानों की जरूरत है और देश लड़ाकू विमानों के बगैर नहीं रह सकता है।' सर्वोच्च अदालत ने इस बिंदु का भी उल्लेख किया कि सितंबर 2016 में जब राफेल सौदे को अंतिम रूप दिया गया था, उस वक्त किसी ने खरीदी पर सवाल नहीं उठाया था।

- सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा कि राफेल सौदे पर सवाल उस वक्त उठे जब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसवा ओलांद ने बयान दिया, यह न्यायिक समीक्षा का आधार नहीं हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई अवसर नहीं है।