इरोम शर्मिला को मिली धमकी, शादी की तो जान से मार डालेंगे

नई दिल्ली (5 अगस्त): मणिपुर की सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला को एक कट्टरपंथी संगठन ने जान से मारने की धमकी दी है। संगठन को उनके चुनाव लड़ने और मणिपुर से बाहर शादी करने पर ऐतराज है। अलायंस फॉर सोशलियस्‍ट यूनिटी कांगलेईपाक(ASUK) ने शर्मिला को धमकी देते हुए कहा कि "इससे पहले भी पब्लिक लाइफ में शामिल होने की कोशिश करने वाले कई क्रांतिकारी नेताओं को मार दिया गया है।" ASUK मणिपुर का अलगाववादी संगठन है तो स्‍वतंत्र मणिपुर की मांग करता रहा है। ASUK के अलावा दो अन्‍य उग्रवादी संगठनों ने भी शर्मिला से अनशन नहीं छोड़ने की चेतावनी दी है। 44 वर्षीय शर्मिला ने 26 जुलाई को सबको यह कह कर चौंका दिया था कि 9 अगस्‍त को वह अपना अनशन खत्म करेंगी। साथ ही उन्‍होंने शादी करने की इच्छा भी व्यक्त की थी। उनके इस बयान पर उनके परिवार और कुछ संगठनों ने विरोध जताया है। 

- ASUK प्रेसिडेंट एन ओकेन और वाइस चेयरमैन कस लाब मैतेई ने जारी एक बयान में कहा कि उन्हें मणिपुरी लड़के से ही शादी करनी होगी। - ASUK का कहना है, जिन भी लोगों ने पब्लिक लाइफ में शामिल होने की कोशिश की और राजनीति में कदम रखा उन्‍हें पता है कि यह अंत है। - हालांकि इरोम जिस व्‍यक्ति से शादी करना चाहती हैं वह NRI है लेकिन ASUK की नजरों में वह भारतीय है।  - इरोम शर्मिला गोवा-ब्रिटिश कार्यकर्ता डेसमंड कुटिंहो के साथ शादी करना चाहती हैं।

अपनी इच्छा के बारे में इरोम कोर्ट को भी बता चुकी हैं... - इरोम शर्मिला को हर 15 दिन में मणिपुर की स्थानीय अदालत में पेश होना पड़ता है और उन्होंने ये जानकारी मेजिस्ट्रेट के सामने दी है। - इरोम ने अदालत में कहा, "किसी भी राजनीतिक दल ने मेरे लोगों की आफ़्सपा हटाने की मांग को नहीं उठाया। - इसीलिए मैंने ये विरोध ख़त्म करने और 2017 के असेंबली चुनावों की तैयारी करने का फ़ैसला किया है। - मैं 9 अगस्त को अदालत में अपनी अगली पेशी के समय भूख हड़ताल ख़त्म कर दूंगी।'' - 44 साल की शर्मिला न केवल अगले साल विधानसभा चुनाव में भाग लेंगी बल्कि वो अब शादी भी करना चाहती हैं।

कौन हैं इरोम शर्मिला: - आयरन लेडी इरोम का जन्‍म 14 मार्च 1972 में हुआ था। - इरोम मणिपुर से आर्म्‍ड फोर्स स्‍पेशल पावर एक्‍ट 1958, जिसे सशस्‍त्र बल विशेषाधिकार कानून को हटाए जाने की मांग पर 2 नवंबर 2000 से आजतक वो भूख हड़ताल पर हैं। - इस भूख हड़ताल के तीसरे दिन सरकार ने इरोम शर्मिला को गिरफ्तार कर लिया। उन्‍होंने जब भूख हड़ताल की शुरुआत की थी, वे 28 साल की युवा थीं। - कुछ लोगों को लगा था कि यह कदम एक युवा ने भावुकता में उठाया है, लेकिन समय के साथ इरोम शर्मिला के इस संघर्ष की सच्चाई लोगों के सामने आती गई। आज वह 44 साल की हो चुकी हैं। - वे आर्म्ड फोर्सेज़ स्पेशल पॉवर्स एक्ट 'अफस्पा' AFSPA हटाए जाने की मांग को लेकर 2 नवंबर 2000 से आज तक अनशन पर हैं। - अफस्पा के तहत सेना को मणिपुर में अतिरिक्त शक्तियां मिली हुई हैं। - इरोम शर्मिला के अनशन शुरू करने से 10 दिन पहले ही कथित रूप से असम राइफल्स के सैनिकों ने 10 लोगों को गोलियों से मार डाला था, जिनमें दो बच्चे भी शामिल थे। - 2000 में उस समय अनशन के तीसरे दिन सरकार ने इरोम को अरेस्ट कर लिया था। - इरोम को कई साल से नाक में डली ट्यूब के ज़रिये जबरन खिलाया जा रहा है - उनके नाम पर अबतक दो रिकॉर्ड दर्ज हो चुके हैं। पहला सबसे लंबी भूख हड़ताल करने और दूसरा सबसे ज्‍यादा बार जेल से रिहा होने का रिकॉर्ड दर्ज है। - 2014 में अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस के मौके पर उन्‍हें एमएसएन ने वूमन आइकन ऑफ इंडिया का खिताब दिया था। - इरोम शर्मिला ने 1000 शब्दों में एक लंबी ‘बर्थ’ शीर्षक से एक कविता लिखी थी। - यह कविता ‘आइरन इरोम टू जर्नी- व्हेयर द एबनार्मल इज नार्मल’ नामक एक किताब में छपी थी। इस कविता में उन्‍होंने अपने लंबे संघर्ष के बारे में बताया है। - साल 2014 में दिल्ली के जंतर मंतर पर आमरण अनशन करने के लिए उन पर साल 2013 में सुसाइड की कोशिश को लेकर ट्रायल चला था। - बाद में कोर्ट ने उन्हें इस आरोप से बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इस बात के सबूत नहीं है कि उनका यह प्रदर्शन एक सुसाइड एक्ट है।

क्या है AFSPA? - आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर्स एक्ट (AFSPA) संसद में 1958 में पास किया गया था।  - शुरू में इसे अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा में लगाया गया था। - इसके तहत आर्मी को किसी भी शख्स की बिना वारंट के तलाशी या अरेस्ट करने का विशेषाधिकार हासिल है। - यदि वह शख्स विरोध करता है, तो उसे जबरन अरेस्ट करने का भी हक आर्मी के के पास है। - इतना ही नहीं, कानून तोड़ने वाले किसी भी शख्स पर फायरिंग का राइट भी आर्मी को है।  - अगर इस दौरान किसी की मौत भी हो जाती है, तो उसकी जवाबदेही फायरिंग करने या ऑर्डर देने वाले अफसर की नहीं होती।

इरोम शर्मिला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी थी चिट्ठी... 29 मई 2014 को इरोम शर्मिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी चिट्ठी लिख चुकी हैं। मणिपुर में 14 साल से सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून (आफ़्स्पा) हटाए जाने की मांग के साथ भूख हड़ताल कर रहीं इरोम शर्मिला ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने प्रधानमंत्री से दरख़्वास्त की है कि वो ये क़ानून मणिपुर से हटा दें और एक ऐसे नेता बनें जो अहिंसा में विश्वास करता है। उन्होंने अपनी चिट्ठी में कलिंग के सम्राट अशोक के भयानक तबाही, हत्याओं और विलाप देखने के बाद अहिंसा का रास्ता चुनने का हवाला दिया है और उसे गुजरात दंगों से जोड़ा है।

इरोम ने लिखा है, “अशोक की ही तरह आप भी अपने देश पर अहिंसा के हथियार से राज करें, ताकि लोगों से प्यार और मोहब्ब्त मिले, और गोधरा के बाद बने मोदी-विरोधी गुटों में जो डर पैदा हुआ वो कम हो जाए।”

अपनी चिट्ठी में इरोम ने कहा है कि पांच साल पहले तक वो नरेंद्र मोदी को एक हिंसात्मक नेता के तौर पर ही जानती थीं, पर उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद अब वो उनसे शांति की उम्मीद रखती हैं।