इस ट्रेन में बिना टिकट यात्रा करते हैं मुसाफिर

सौरव कुमार, पटना (23 फरवरी): आज हम आपको एक ऐसी ट्रेन के बारे में बताने जा रहे है जो कहने को तो सवारी ट्रेन है, लेकिन इसमें सवारी नहीं होती है। ये एक ऐसी ट्रेन है जिसे चलाने के लिए रेलवे सालाना एक करोड़ से अधिक खर्च करती है, जबकि उस लिहाज से आमदनी शून्य है। टिकट काउंटर सालो से बंद है लेकिन फिर भी ये ट्रेन 11 सालो से चल रही है।

बिहार की राजधानी पटना के आर ब्लॉक और दीघा के बीच चलने वाली सवारी गाड़ी मुसाफिरों के लिए सबसे सस्ती और भारतीय रेल के लिए सबसे महंगी ट्रेन है। सस्ती इसलिए क्योंकि जो लोग इस पर बैठते हैं उनका टिकट नहीं लगता है, क्योंकि आर ब्लॉक से दीघा तक 9 हॉल्ट हैं और सभी हॉल्ट पर टिकट काउंटर तो हैं लेकिन ये बंद पड़े हैं।

ये ट्रेन भारतीय रेल के लिए बेहद महंगी पड़ती है, क्योंकि तीन डिब्बों में ज़्यादा से ज़्यादा 10 सवारी होती है यानि ट्रेन बिल्कुल खाली अपडाउन करती है। आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि इसे चलाने में रोज़ाना 30 हज़ार रूपए खर्च आते हैं यानि सालाना एक करोड़ से ज़्यादा। फिर भी करोड़ों का घाटा सहने के बाद भी ये ट्रेन 11 सालों से चल रही है।

ये ट्रेन सिर्फ सवारियों के लिए ही नहीं बल्कि सुरक्षा के लिए के लिहाज़ से भी गजब है। ट्रैक के आसपास लोग रह रहे हैं, दोनों तरफ जानवरों भी बंधे हुए हैं जो किसी भी वक्त ट्रेन के सामने आ सकते हैं। लेकिन इन सबके बीच ड्राइवर ट्रेन को रोजा लाया ले जाया जाता है। ट्रेन के रास्ते में क्रॉसिंग से बड़ी-बड़ी गाड़ियां गुजरती हैं। इसके बावजूद यहां फाटक नहीं है, फाटक के बदले रस्सी बांध दी जाती है।

भारतीय रेल की ये अजब ट्रेन 2005 में चलाई गई थी। उस वक्त लालू प्रसाद यादव रेलमंत्री थे, मकसद था सचिवालय और विधानसभा के कर्मचारियों को समय पर ऑफिस पहुंचाना। साथ ही दीघा के गरीब लोगों को बाजार तक पहुंचाना, लेकिन शुरू से ही ये ट्रेन अपने अटपटे समय को लेकर लोगों को नहीं भा रही है।

आर ब्लॉक से दीघा तक का टिकट सिर्फ 5 रुपए रखा गया है, लेकिन मुश्किल ये है कि जब टिकट काउंटर है ही नहीं तो टिकट कैसे लें। सीएम नीतीश कुमार ने पूर्व रेल मंत्री ममता बनजी को इस ट्रेन को बन्द करने की सिफारिश की थी। साथ ही रेलवे ट्रैक हटाकर फॉर लेन बनाने का प्रस्ताव भी रखा था लेकिन फाइल अभी भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच घूम रही है। इसमें सफर करने वाले कुछ लोगों का मानना है कि इसमें सुधार की ज़रूरत है ना बंद करने की।