75 साल पहले महात्मा गांधी ने भरी थी ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की हुंकार

नई दिल्ली (9 अगस्त): आज यानि 9 अगस्त 1942 के दिन कांग्रेस के मुंबई अधिवेशन में महात्मा गांधी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया था। आजादी की लड़ाई की दिशा में किया जाने वाला अंतिम और कारगर आंदोलन ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ ने ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिला दीं। आंदोलन इतने बड़े स्तर पर हुआ कि अंग्रेजों को इसे दबाने के लिए काफी समय लग गया।

इस अधिवेशन में महात्मा गांधी ने कहा था, “मैं तो एक ही चीज लेने जा रहा हूं-आज़ादी! नहीं देना है तो कत्ल कर दो। आपको एक ही मंत्र देता हूं करेगें या मरेगें। आज़ादी डरपोकों के लिए नहीं है। जिनमें कुछ कर गुजरने की ताकत है, वही जिंदा रहते हैं”

इस समय दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था और इसमें इंग्लैंड बुरी तरह उलझा हुआ था। आंदोलन शुरू होने से पहले 8 अगस्त को गांधी जी समेत सभी बड़े-बड़े कांग्रेसी नेताओं को ब्रिटिश सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन 9 अगस्त को छोटे कांग्रेसी नेताओं ने आंदोलन की बागडोर संभाली और देशभर में युवा कार्यकर्ता हड़तालों और तोड़फोड़ की कार्रवाइयों द्वारा आंदोलन को चलाते रहे।

इस आंदोलन में लाल बहादुर शास्त्री ने अहम योगदान दिया, लेकिन 19 अगस्त को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अंग्रेजों ने आंदोलन को दबाने के लिए काफी कठोर रवैया अपनाया। इसके बावजूद भी विद्रोह को दबाने के लिए ब्रिटिश सरकार को एक साल से ज्यादा का वक्त लग गया।

इस आंदोलन में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 900 लोगों की मौत हो गई और हजारों लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ को अगस्त क्रांति के नाम से भी जाना जाता है। 1857 की क्रांति के बाद यह पहला आंदोलन था, जिसने अंग्रेजी सत्ता में हलचल पैदा कर दी और दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद अंग्रजों ने भारत से अपना बोरिया बिस्तर समेट लिया।