1942 भारत छोड़ो आंदोलन, जिसने हिला दी थी ब्रिटिश हुकूमत की जड़ें

डॉ. संदीप कोहली, नई दिल्ली (9 अगस्त): 

देश को आजादी भले ही 15 अगस्त 1947 को मिली थी लेकिन आजादी की नींव 1857 के स्वतंत्रता संग्राम ने रख दी थी और उसके 85 साल बाद यानी 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन ने उस नींव पर इमारत खड़ी करना आरम्भ कर दिया था। सन 1942 में महात्मा गांधी के नेतृत्‍व में शुरु हुआ यह आंदोलन बहुत ही सोची-समझी रणनीति का हिस्‍सा था, इसमें पूरा देश शामिल हुआ। कश्‍मीर से कन्‍याकुमारी और कच्छ से कामरूप तक यह एक ऐसा आंदोलन था, जिसने पूरी ब्रिटिश हुकूमत की जड़ें हिलाकर रख दी थीं। जानिए 'भारत छोड़ो' आंदोलन की पूरी कहानी... 

क्रिप्स मिशन का आगमन...  - 1939 में दूसरा विश्वयुद्ध छिड़ गया, जापान, जर्मनी ने इंगलैंड और उसके उपनिवेशों पर हमला कर दिया।  - युद्ध के दौरान इंगलैंड के प्रधानमंत्री विन्सटन चर्चिल ने अपने युद्धकालीन मंत्रिमण्डल स्टैफोर्ड क्रिप्स को भारत भेजा।  - स्टैफोर्ड क्रिप्स के मिशन को ही क्रिप्स मिशन कहा जाता है, जो सिर्फ एक सदस्यीय था।  - क्रिप्स 30 मार्च 1942 को एक प्रस्ताव के साथ भारत आए।  - इसमें सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान भारत से ब्रिटिश सरकार की मदद की मांग की गई थी।  - 1942 में जापान की फौजों के रंगून पर कब्जा करने से भारत के सीमांत क्षेत्रों पर खतरा पैदा हो गया था।  - ब्रिटेन युद्ध में भारत का सक्रिय सहयोग पाना चाहता था।  - इसके बदले कहा गया कि लड़ाई खत्म होने के बाद भारतीयों को एडमिनिस्ट्रेशन के पूरे पॉवर्स दे दिए जाएंगे।  - लेकिन यहां भी ब्रिटिश हुकूमत ने 'डोमिनियम स्टेट' अवधारणा रखी।  - यानी संविधान का निर्माण तो भारतीय करेंगे लेकिन रक्षा का उत्तरदायित्व ब्रिटिश सरकार का होगा।  - इसे कांग्रेस और महात्मा गांधी ने नामंजूर कर दिया।  - महात्मा गांधी ने इस मिशन को 'पोस्ट डेटेड चैक' की संज्ञा दी।  - अर्थात अंग्रेज एक ऐसा दिवालिया बैंक है जो भविष्य में कभी भी फेल हो सकता है।  - महात्मा गांधी ने 9 अगस्त 1942 को भारत छोडो आंदोलन का आवाह्न किया।  - अगस्त में होने की वजह से इसे इतिहास में अगस्त क्रांति के नाम से भी जाना जाता है। 

भारत छोड़ो आंदोलन का आवाह्न...  - 14 जुलाई 1942 में वर्धा में कांग्रेस कार्य समिति ने एक प्रस्ताव पास किया जिसमें भारत से ब्रिटिश शासन तत्काल समाप्त करने की घोषणा की गई।  - इसी मिटिंग में भारत छोड़कर जाने के लिए अंग्रेजों को मजबूर करने के लिए 1942 में सामूहिक नागरिक अवज्ञा आंदोलन शुरू करने का आवाह्न किया गया।  - सविनय अवज्ञा आन्दोलन का यह तीसरा चरण था, इससे पहले 1929 और 32 में आंदोलन हुआ था।  - 8 अगस्त 1942 को मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पास किया गया जिसे भारत छोड़ो प्रस्ताव के नाम से जाना गया।  - गोवालिया टैंक मैदान से गांधीजी ने भाषण दिया, जिसमें कहा, ‘मैं आपको एक मंत्र देना चाहता हूं जिसे आप अपने दिल में उतार लें, यह मंत्र है, ‘करो या मरो’।  - इसी गोवालिया टैंक मैदान आगे चलकर अगस्त क्रांति मैदान के नाम से जाना जाने लगा।  - 9 अगस्त को गांधी, नेहरू, पटेल, आजाद समेत अन्य नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।  - इसके बाद जनता ने खुद आंदोलन की बागडोर अपने हाथों में ली और इसे आगे बढाया क्योंकि उस समय नेतृत्व करने वाला कोई नहीं था।  - आंदोलन में रेलवे स्‍टेशनों, दूरभाष कार्यालयों, सरकारी भवनों तथा उपनिवेश राज के संस्‍थानों पर बड़े स्‍तर पर हिंसा शुरू हो गई।  - इसमें तोड़ फोड़ की ढेर सारी घटनाएं हुईं और सरकार ने हिंसा की इन गतिविधियों के लिए कांग्रेस और गांधी जी को उत्तरदायी ठहराया।  - कांग्रेस पर प्रतिबंद लगा दिया गया और आंदोलन को दबाने के लिए सेना को बुला लिया गया।  - सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस जनान्दोलन में 942 लोग मारे गये, 1630 घायल हुए, 18000 डीआईआर में नजरबंद हुए तथा 60229 गिरफ्तार हुए।  - इस बीच नेता जी सुभाष चंद्र बोस, जो अब भी भूमिगत थे, कलकत्ता में ब्रिटिश नजरबंदी से निकल कर विदेश पहुंच गए।  - ब्रिटिश राज को भारत से उखाड़ फेंकने के लिए उन्‍होंने वहां इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) या आजाद हिंद फौज का गठन किया।  - 1942 में जापान की फौजों के साथ मिल भारत की और रूख किया।  - ब्रिटिश और कामनवेल्थ सेना से बर्मा सहित इम्फाल और कोहिमा में एक साथ जमकर मोर्चा लिया।  - भारत छोड़ो आंदोलन की विशालता और व्यापकता को देखते हुए अंग्रेजों को विश्वास हो गया था कि उन्हें अब इस देश से जाना पड़ेगा। 

9 अगस्त का ही दिन क्यों चुना गया...  - 6 अगस्त 1925 को ब्रिटिश सरकार का तख्ता पलटने के उद्देश्य से 'बिस्मिल' के नेतृत्व में 10 जुझारू कार्यकर्ताओं ने काकोरी कांड किया था।  - काकोरी कांड ब्रिटिश सरकार का ही खजाना लूट लेने की एक ऐतिहासिक घटना थी। - जिसकी यादगार ताजा रखने के लिए पूरे देश में हर साल 9 अगस्त को काकोरी काण्ड स्मृति-दिवस मनाने की परंपरा भगत सिंह ने प्रारंभ कर दी थी।  - इस दिन बहुत बड़ी संख्या में नौजवान एकत्र होते थे। कांग्रेस ने भारत छोड़ो आंदोलन के लिए 9 अगस्त का दिन एक सोची-समझी रणनीति के तहत चुना था।  - 900 से ज्‍यादा लोग मारे गए, हजारों लोग गिरफ्तार हुए इस आंदोलन की व्‍यूह रचना बेहद तरीके से बुनी गई। 

नेताओं की गिरफ्तारी, जनता ने संभाली आंदोलन की बागडोर...  - 9 अगस्त 1942 को दिन निकलने से पहले ही कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सभी सदस्य गिरफ्तार कर लिया गया। - ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस को गैरकानूनी संस्था घोषित कर दिया।  - सभी बड़े नेताओं तो 'ऑपरेशन जीरो ऑवर' के तहत जेलों में ठूस दिया गया।  - गांधी जी के साथ भारत कोकिला सरोजिनी नायडू को यरवदा पुणे के आगा खान पैलेस में नजरबंद कर दिया गया। - डॉ.राजेंद्र प्रसाद को पटना जेल व अन्य सभी सदस्यों को अहमदनगर के किले में नजरबंद किया गया था।  - इसके बाद जनता ने खुद आंदोलन की बागडोर अपने हाथों में ली और इसे आगे बढाया क्योंकि उस समय नेतृत्व करने वाला कोई नहीं था।  - आंदोलन की अगुवाई छात्रों, मजदूरों और किसानों ने की, बहुत से क्षेत्रों में किसानों ने वैकल्पिक सरकार बनाई। - उत्तर और मध्य बिहार के 80 प्रतिशत थानों पर जनता का राज हो गया। - पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बिहार में गया, भागलपुर, पूर्णिया और चंपारण में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह हुआ।  - आंदालेन की बागडोर अरुणा आसफ अली, राममनोहर लेाहिया, सुचेता कृपलानी, छोटू भाई पुराणिक, बीजू पटनायक और जयप्रकाश नारायण ने संभाली।  - भूमिगत आंदोलनकारियों की मुख्य गतिविधि होती थी- संचार साधनों को नष्ट करना।  - उस समय रेडियो का भी गुप्त संचालन होता था, राममनोहर लेाहिया कांग्रेस रेडियो पर देश की जनता को संबोधित करते थे।  - ब्रिटिश सरकार को इस जनविद्रोह को काबू करने में एक साल लग गए, विद्रोह थोड़े समय तक चला, पर यह तेज था। 

क्‍या उद्देश्‍य था इस आंदोलन का  - सही मायने में यह एक जन आंदोलन था, जिसमें लाखों आम हिंदुस्तानी चाहे अमीर हो, गरीब हो सभी लोग शामिल थे।  - इस आंदोलन की सबसे बड़ी खास बात यह थी कि इसने युवाओं को बड़ी संख्या में अपनी ओर आकर्षित किया।  - कॉलेज छोड़कर युवा जेल की कैद हंसते-हंसेत स्‍वीकार कर रहे थे।  - सबसे बड़ी बात यह थी कि इस आंदोलन का प्रभाव ही इतना ज्‍यादा था कि अंग्रेज हुकूमत पूरी तरह हिल गई थी।  - उसे इस आंदोलन को दबाने के लिए ही साल भर से ज्‍यादा का समय लगा।  - जून 1944 में जब विश्व युद्ध समाप्ति की ओर था, तब गांधी जी को रिहा किया गया। 

आजाद भारत... - सेकंड वर्ल्ड वार की समाप्‍ति के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्‍लेमेंट रिचर्ड एटली के नेतृत्‍व में लेबर पार्टी की सरकार बनी।  - लेबर पार्टी आजादी के लिए भारतीय नागरिकों के प्रति सहानुभूति की भावना रखती थी।  - मार्च 1946 में एक केबिनैट कमीशन भारत भेजा गया, जिसके बाद भारतीय राजनैतिक परिदृश्‍य का सावधानीपूर्वक अध्‍ययन किया ।  - एक अंतरिम सरकार के निर्माण का प्रस्‍ताव दिया गया और प्रां‍तों और राज्‍यों के मनोनीत सदस्यों को लेकर संघटक सभा का गठन किया गया।  - जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्‍व ने एक अंतरिम सरकार का निर्माण किया गया।  - मुस्लिम लीग ने संघटक सभा के विचार विमर्श में शामिल होने से मना कर दिया और पाकिस्‍तान के लिए एक अलग राज्‍य बनाने में दबाव डाला।  - भारत के वाइसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत और पाकिस्‍तान के रूप में भारत के विभाजन की एक योजना प्रस्‍तुत किया।  - तब भारतीय नेताओं के सामने इस विभाजन को स्‍वीकार करने के अलावा कोई विकल्‍प नहीं था, क्‍योंकि मुस्लिम लीग अपनी बात पर अड़ी हुई थी।  - भारत में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई 5 लाख लोग मारे गए, 1.5 करोड़ लोगों को दोनों तरफ से घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। - इस प्रकार 14 अगस्‍त 1947 की मध्‍य रात्रि को भारत आजाद हुआ तब से हर साल भारत में 15 अगस्‍त को स्‍वतंत्रता दिवस मनाया जाता है।