भोपाल एनकाउंटर - कठघरे में जेलकर्मी

नई दिल्ली ( 1 नवंबर ) : सिमी के संदिग्ध आतंकियों के भोपाल जेल से फरार होने और कुछ ही घंटों में एनकाउंटर में मारे जाने पर मध्य प्रदेश सरकार ने भले ही राहत की सांस ली हो पर इस पूरे मामले ने राज्य सरकार और जेलकर्मियों को कठघरे में खड़ा किया है। पूरे घटनाक्रम पर कई सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल राज्य सरकार इन सवालों का जवाब नहीं दे रही है, लेकिन खुद मुख्यमंत्री ने माना है कि चूक हुई है। इसीलिए उन्होंने अलग से जांच का भी ऐलान किया है। 

सिमी आंतकवादियों के एनकाउंटर को लेकर जेलकर्मी पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले की जांच के लिए बी ब्लाक के कैदियों से पुछताछ हो रही है। सिमी आतंकियों से नजदीकी रखने वाले बंदियों से भी हर छोटी जानकारियां जुटाई जा रही हैं। आतंकियों को जूते, कपड़े, घड़ी मुहैया कराने वाले मददगारों का पता लगाने के लिए पुलिसकर्मियों की तीन टीमें लगाई गई हैं। 

सिमी आतंकियों ने जेल से भागने का प्लान एक महीने पहले बना लिया था। पुलिस ने प्लास्टिक और लकड़ी की बनाई हुई एक दर्जन चाबियां बरामद की हैं। साथ ही पुलिस ने धार देकर हमला में इस्तेमाल किए जाने के लिए रखे गए प्लेट, ग्लास, चम्मच भी बरामद किए हैं।

एनकाउंटर पर उठ रहे सवाल...

-आतंकियों ने लाॅकअप खोलेन के लिए प्लास्टिक और लकड़ी की चाबियां बनाई तो किसी जेलकर्मी को भनक क्यों नहीं लगी।

-जेलकर्मियों कर्मियों को कंबल दिए जाते हैं, तो आतंकियों के पास इतनी संख्या में चद्दरें कहां से आईं। 

-उनके पास नए कपड़े, जूते और घड़ी कहां से आई

-आतंकियों की रोड मैप बनाने में किसने मदद की। 

-आतंकियों को स्पोटर्स के जूते, नए कपड़े तो दिए, लेकिन उनके मददगारों ने भागने के लिए गाड़ी क्यों नहीं मुहैया कराई। 

-आतंकियों ने तीन पुलिस जवानों पर धारदार हथियारों से हमला कर उन्हें घायल किया। तब पुलिसकर्मियों ने उन्हें क्यों नहीं पकड़ा। 

-सवाल यह भी है कि जब उनके भागने का इनपुट था, तो सुरक्षा क्यों नहीं बढ़ाई गई। 

-जेल में बंद सिमी आतंकियों को डी ब्लाक में रखा गया था। शाम को जेल में बंदियों को लाॅकअप में रखकर गिनती होती है, तो फिर आतंकी बैरक से बाहर कैसे आए।

-रमाशंकर यादव की हत्या करने और एक अन्य जेलकर्मी को बंधक बनाने के बाद शोर शराबा न होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। 

-आतंकियों के पास जब कोई हथियार नहीं मिला। गन नहीं मिली फिर फायर क्यों किए गए।

-जेल से भागते समय आतंकियों ने गेट तोड़ा जबकि गेट की दिवार खुली और छोटी थी।

-आईजी भोपाल योगेश चैधरी ने कहा, आतंकियों के पास हथियार थे। क्राॅस फायरिंग हुई। जबकि एटीएस चीफ संजीव समी का कहना हैं कि आतंकियों के पास केवल वे ही हथियार थे जो उन्होंने जेल में तैयार किए थे। फायरिंग करने वाला कोई हथियार नहीं था।

-जब आतंकियों ने पत्थर बरसाऐ तो पुलिस ने फायरिंग की। फायरिंग पैर पर की जानी थी। फिर सीने पर क्यों मारी गोली।

-स्निफर डाॅग के माध्यम से आतंकियों तक पहंुचने की बात पुलिस के आला अधिकारियों ने कही। जबकि स्पाॅट पर एक भी स्निफर डाॅग नहीं था।