बुलंदशहर गैंगरेप: यूपी पुलिस पर सवाल ही सवाल

नई दिल्ली(2 अगस्त): दिल्ली-कानपुर हाइवे पर मां-बेटी से हुए गैंगरेप पर यूपी पुलिस की जांच सवालों के घेरे में आ गई है। 72 घंटे पहले हुए इस वारदात को लेकर पुलिस लगातार अपनी स्क्रिप्ट बदल रही है। 

आइए जानते हैं क्यों सवाल उठ रहे हैं यूपी पुलिस पर...

- कभी आरोपी छह तो कभी आठ बताए

- एक ओर पुलिस पकड़े तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया है, लेकिन यह तक नहीं बता सकी आरोपी वारदात करने कार से आए थे या पैदल आए थे।

वह वापस कैसे गए?

पुलिस उनका बावरिया कनेक्शन बताती रही, तीनों आरोपियों का संबंध नहीं जोड़ सकी। रईस घुमंतू जाति का नहीं है। उसकी रहन-सहन की शैली भी आम आदमी जैसी है। उसका आधार कार्ड भी बना हुआ है। ऐसे में उसके बावरिया होेने के दावे पर सवाल उठ रहे हैं। बता दें कि बावरिया 500 रुपये की लूट के लिए भी मर्डर करने से नहीं डरते। उनकी कार्यशैली आम क्रिमिनल से बिल्कुल जुदा है।    पुलिस के खुलासे में कई झोल

हाईवे पर गैंगरेप मामले का खुलासा कर पुलिस ने भले ही तीन आरोपियों को जेल भेज दिया लेकिन मामले में अब भी कई झोल हैं। पुलिस तीनों आरोपियों का आपस में कनेक्शन और उनका बावरिया गिरोह से संबंध जोड़ने में नाकाम रही है। 

डीजीपी का खुलासा ही संदिग्ध

इतना ही नहीं डीजीपी की प्रेस कान्फ्रेंस में खुलासे के बाद दो आरोपियों को बदलने पर भी पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। इससे डीजीपी का खुलासा ही संदिग्ध हो गया है। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों में से किसी एक की भी क्राइम हिस्ट्री नहीं बता सकी है।

प्रदेश सरकार और राजनीतिक दबाव में काम कर रही पुलिस ने जिन तीन आरोपियों को बिना मीडिया से रूबरू कराए बिना आनन फानन में जेल भेज दिया वे जबर सिंह निवासी नोएडा, रईस निवासी बुलंदशहर और साबिज निवासी हापुड़ हैं। तीनों अलग-अलग जिले से हैं, इनके आपसी कनेक्शन का खुलासा डीआईजी नहीं कर सकीं।

पुलिस ने तीनों की क्राइम हिस्ट्री तक नहीं बताई। स्थानीय होने के कारण रईस के घर वालों ने उसका पुलिस रिकार्ड न होने का दावा किया है। ऐसे में अन्य की आपराधिक हिस्ट्री होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। जब क्राइम हिस्ट्री ही नहीं है तो पुलिस के पास इनके फोटो भी नहीं होंगे।

डीआईजी लक्ष्मी सिंह का कहना है कि 200 फोटो दिखाने के बाद क्रिमिनलों की पहचान कराई गई।

सोमवार और मंगलवार को क्या हुआ...

सोमवार को बुलंदशहर पहुंचे प्रमुख सचिव (गृह) देवाशीष पांडा और डीजीपी जावीद अहमद के सामने तीन लोगों को हिरासत में लिए जाने खुलासा किया था। मंगलवार को दो नए आरोपियों को जोड़ दिया। इनमें बुलंदशहर के सुतारी गांव का रईस कॉमन है।

रविवार को पुलिस लाइन में डीजीपी जावीद अहमद और प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पंडा ने खुलासा किया था कि वारदात को अंजाम देने में बबलू निवासी फरीदाबाद, नरेश निवासी बठिंडा (पंजाब) और रईस निवासी सुतारी शामिल हैं लेकिन डीजीपी के जाते ही पुलिस की लिस्ट बदल गई और रविवार रात दो आरोपियों के नाम हटाकर उनकी जगह दो अन्य नाम जोड़ दिए।

डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने बताया कि वारदात में रहीसुद्दीन उर्फ रईस पुत्र सोहराब निवासी सुतारी थाना कोतवाली देहात, साबिज पुत्र आस मोहम्मद निवासी आजरू दहपा थाना पिलखुवा (जिला हापुड़) और जबर सिंह पुत्र रामू निवासी नगला श्रीगोपाल थाना रबूपुरा (जिला गौतमबुद्धनगर) शामिल थे।   सात भी हो सकते हैं बदमाश : डीआईजी

डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने बताया कि पीड़ित परिवार के मुताबिक, बदमाशों की संख्या 5-6 थी। उन्होंने कहा कि बदमाशों की संख्या सात या इससे अधिक भी हो सकती है। डीआईजी ने बताया कि अभी तक पकड़े गए आरोपियों ने अपने नाम व पते गलत बताए।

सभी ने पुलिस अधिकारियों को गुमराह किया। डीआईजी ने कहा कि जेल में भेजने के बाद इनका पता तलाश करने में दिक्कत आती है। इसलिए इन्हें जेल भेजने से पहले पतों को कनफर्म कराया गया है। गैंगलीडर लापता, बदमाशों के कनेक्शन पर सवाल?

पुलिस अफसरों के दावे पर यकीन करें तो गैंगलीडर अपने साथ चार बदमाशों को लेकर आया था। वह राजस्थान के एक रेलवे स्टेशन पर भी रुका था। वहां से उसने बुलंदशहर की ओर रुख किया। नजदीकी जिले गौतमबुद्धनगर के रबुपुरा के एक आरोपी की पत्नी पहले से ही बावरिया के संपर्क में थी, जिसकी वजह से गैंगलीडर आरोपी के संपर्क में आ गया।

सवाल है कि केवल बुलंदशहर के नजदीकी जिलों तक ही पुलिस कैसे पकड़ बना पाई हैं। सारे सुबूत हाथ में होने के बावजूद पुलिस अभी तक क्यों हांफी और बावरिया तक पहुंचने में क्यों असफलता ही हाथ लगी है?