बोला कतर, बर्लिन दीवार से भी बदतर है हमारी नाकेबंदी

नई दिल्ली ( 17 जून ): कतर ने सऊदी अरब, बहरीन, UAE, मिस्र व अन्य राष्ट्रों द्वारा रिश्ते तोड़ने पर कहा कि यह बर्लिन दीवार से भी ज्यादा बुरा है। कतर के राष्ट्रीय मानवाधिकार कमिटी के प्रमुख अली बिन सामिख अल-मारी नेअरब के बड़े-बड़े देशों द्वारा उसके साथ रिश्ते तोड़ना उसे दी जा रही 'सामूहिक सजा' है। अल-मारी ने संयुक्त राष्ट्रसंघ (UN) से अपील की है कि वह अरब देशों द्वारा की गई नाकाबंदी की वजह होने वाले नुकसान की जांच करे। अल-मारी ने स्विट्जरलैंड के जेनेवा में बोलते हुए कहा, 'यह सामूहिक सजा है और इस नाकेबंदी के कारण हजारों लोगों पर असर पड़ेगा।'


उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, बहरीन, UAE, मिस्र व अन्य राष्ट्रों द्वारा कतर के साथ कूटनीतिक, आर्थिक व परिवहन रिश्ते खत्म करना और परिवहन के रास्तों को बंद करना बर्लिन दीवार से भी ज्यादा बुरा है। मालूम हो कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद बनी बर्लिन की दीवार के कारण पश्चिमी और पूर्वी जर्मनी 2 अलग-अलग हिस्सों में बंट गए थे।


अल-मारी ने अरब राष्ट्रों से कतर पर लगाए गए प्रतिबंध और नाकेबंदी खत्म करने की अपील की। मालूम हो कि सऊदी व उसके सहयोगी राष्ट्रों ने कतर पर आतंकवादी संगठनों की मदद का आरोप लगाते हुए उसके साथ अपने कूटनीतिक व आर्थिक संबंध तोड़ने का ऐलान किया था। इन देशों ने कतर पर यह इल्जाम भी लगाया कि वह उनके आंतरिक मामलों में दखलंदाजी की कोशिश कर रहा है।


अल-मारी ने मांग की है कि UN के मानवाधिकार परिषद को इस नाकेबंदी की निंदा करनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने UN से एक जांच दल भेजकर इस नाकेबंदी के कारण कतर पर पड़े नकारात्मक असर का पता लगाने की भी मांग की है।