पंजाब सरकार ने पैरोल पर रिहा किए दो आतंकी

मनिंदर सिंह मोंगा, अमृतसर (24 अप्रैल): वैसे तो आतंक और राजनीति को अलग-अलग रखा जाना चाहिए, लेकिन अगर चुनाव पास हों तो फिर सियासी दलों को कुछ भी नहीं दिखता। यही वजह है कि पंजाब में 24 घंटे के अंदर दो-दो खूंखार आतंकियों को पैरोल पर रिहा कर दिया गया है। जिन आतंकियों ने मासूमों का खून बहाया, वो अब पैरोल के सहारे खुली सांस ले रहे हैं। बात चाहे 1993 बम ब्लास्ट के दोषी भुल्लर की हो या फिर कर्नाटक और दिल्ली को दहलाने वाले खैहरा की। दोनों की रिहाई के बाद पंजाब की बादल सरकार कटघरे में है।

1993 में दिल्ली रे रायसीना रोड पर जोरदार धमाके से दिल्ली को दहलाने वाला दोषी आतंकी देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर को पैरोल पर रिहा कर दिया गया है। इस धमाके में यूथ कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा तो बाल-बाल बच गए थे, लेकिन 9 लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। भुल्लर की दिमागी हालत ठीक नहीं होने का हवाला देकर परिवार की तरफ से पैरोल की याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद भुल्लर को 2 लाख के मुचलके पर 21 दिनों के लिए रिहा कर दिया गया।

भुल्लर की रिहाई के 24 घंटे पहले खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स के आतंकी रहे दोषी गुरदीप सिंह खैहरा को 28 दिन की पैरोल पर रिहा किया गया था। खैहरा दिल्ली और कर्नाटक बम ब्लास्ट का दोषी है और उम्र कैद की सज़ा काट रहा है। उम्र कैद की सज़ा काट रहे दोनों दोषियों की रिहाई के बाद पंजाब की सियासत गर्मा गई है। कांग्रेस भुल्लर की रिहाई को जायज ठहराती है लेकिन बाकी दोषियों की रिहाई में उन्हें चुनावी साजिश की बू आती है, हालांकि अकाली दल इस आरोप को सिरे से खारिज कर रहा है।

पार्टियों का सियासी तकाजा जो भी लेकिन हकीकत ये है कि सुप्रीम कोर्ट से मौत की सजा बदले जाने के बाद से भुल्लर उम्रकैद की सजा काट रहा है। उसे 25 अगस्त, 2001 को टाडा अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। उसे पिछले साल जून में दिल्ली की तिहाड़ जेल से अमृतसर केंद्रीय कारागार भेजा गया था। वहीं खैहरा को टाडा एक्ट के तहत 1991 में उम्रकैद की सजा हुई थी।