विक्टिम को दिए 10 लाख रुपए, हाईकोर्ट ने करवाया रेप केस का निपटारा

मुंबई (27 जुलाई) :  7 महीने की प्रेग्नेंट और रेप विक्टिम को 10 लाख रुपये देने के समझौते पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने 30 साल के एक शख्स के खिलाफ रेप के चार्जेस रद्द कर दिए।   

पीड़ित महिला ने आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रोकने के लिए कोर्ट में सहमति दी थी। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से पता चला है कि दोनों आपसी सहमति से रिलेशनशिप में थे। ये जानते हुए भी कि आरोपी शख्स पहले से शादीशुदा थे। कोर्ट ने आदेश दिया कि रकम को एक राष्ट्रीयकृत बैंक में 10 साल के लिए जमा कराया जाए। रकम पर अर्जित ब्याज पीड़ित को दिया जाएगा। समय अवधि समाप्त होने पर वह रकम को निकाल सकती है। 6 जून 2016 को पीड़ित बंद गार्डन पुलिस में FIR दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 376 के तहत मामला दर्ज किया था। FIR में कहा गया कि पीड़ित को शादी का झांसा देकर रेप किया गया।  बाद में आरोपी ने FIR हटाने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। आरोपी के वकील ने दलील दी कि पीड़ित के बयानों से पता चलता है कि दोनों आपसी सहमति के साथ रिलेशनशिप में थे। पीड़ित ने अपने वकील सचिन चंदन के साथ कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया। हलफनामे में कहा गया है कि FIR गलतफहमी का नतीजा थी। पीड़ित ने कहा कि कई दिनों से उसका आरोपी से संपर्क नहीं हो रहा था। इसलिए उसने पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।  पीड़ित ने हाई कोर्ट की जस्टिस अभय ओका और अमजद सैयद की बेंच के सामने पेश होकर कहा कि आरोपी के खिलाफ FIR रद्द होने पर उसे कोई दिक्कत नहीं है। आरोपी भी 10 लाख रुपये जमा कराने के लिए राजी हो गया। इसके साथ ही उसने पीड़त के बच्चे की देखरेख के लिए भी हामी भर दी। शुरुआती सुनवाई में आरोपी ने पैसों की पहली किस्त के रूप में 5 लाख रुपये जमा करा दिए हैं।