UNSC ने पुलवामा हमले को बताया जघन्य और कायराना, जैश को बताया खतरनाक

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 फरवरी): संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने नापाक पाकिस्तान और उसके आतंकियों की पुलवाम में किए गए कायराना हरकतों की निंदा की है।  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव लाकर पुलवामा आतंकी हमले के जघन्य और कायराना बताया है। सुरक्षा परिषद ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे हमलों के दोषियों को न्याय के कठघरे में लाकर कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले पर यूएनएससी के बयान में कहा है कि, 'सुरक्षा परिषद के सदस्य 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर में हुए सूइसाइड बॉम्बिंग के जघन्य और कायराना कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, जिसमें भारतीय पैरा मिलिटरी फोर्स के 40 जवानों की मौत हुई है और दर्जनों जख्मी हो गए। इस हमले की जैश-ए-मोहम्मद ने जिम्मेदारी ली है।'


सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों ने जवानों के पीड़ित परिवारों, घायल लोगों और भारत सरकार के प्रति गहरी सहानुभूति और सांत्वना जाहिर की है। हमले में जख्मी जवानों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की। सुरक्षा परिषद के देशों ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद किसी रूप में हो, उसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता क्योंकि यह वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है। सुरक्षा परिषद के देशों ने इन जरूरतों पर बल दिया कि आतंकवाद के साजिशकर्ताओं, आयोजकों और फंड देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। जो लोग और संगठन ऐसे कारनामों के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें इंसाफ के कठघरे में खड़ा करने की जरूरत बताई गई। इन देशों ने अपील की है कि अंतरराष्ट्रीय नियम-कानून और सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों के तहत एक दूसरे की मदद करते हुए आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।  


इसे पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। 15 देशों के इस संगठन में चीन भी शामिल है। चीन मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने की भारत की कोशिशों का लगातार विरोध करता रहा है और कई बार वीटो पावर का भी इस्तेमाल कर चुका है। सुरक्षा परिषद ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हमले के लिए जिम्मेदार तत्वों पर शिकंजा कसने में भारत सरकार का सक्रिय सहयोग करने की अपील की है। बयान में कहा गया है, 'आतंकवाद के ऐसे निंदनीय कृत्य के लिए जिम्मेदार साजिशकर्ता, फाइनैंसर, और स्पॉन्सर को न्याय के दायरे में लाने की आवश्यकता है। हम सभी देशों को उनकी अंतरराष्ट्रीय कानूनी बाध्यताओं और सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों का अनुपालन करते हुए भारत सरकार और दूसरी सभी एजेंसियों के साथ सक्रिय सहयोग की अपील करते हैं।'