शहीद महेश यादव के बच्चों ने PM से की ये मांग, जानकर रो पड़ेंगे आप


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (16 फरवरी):
पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों के पार्थिव शरीर जैसै-जैसे उनके घर पहुंच रहे हैं, देश में माहौल गमगीन होता जा रहा है। हर देशवासी में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा चरम पर है और वह मोदी सरकार से मांग कर रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ कुछ ठोस कदम उठाया जाए। हालांकि सरकार भी कह चुकी है कि पाकिस्तान और आतंकियों को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। इस हमले में शहीद होने वाले जवानों में प्रयागराज के महेश यादव भी शामिल है।

महेश यादव सीआरपीएफ में कांस्टेबल थे और बिहार में 118 बटालियन में तैनात थे। महेश अपने पीछे दो मासूम बच्चों को छोड़ गए। बच्चों को शहादत का मतलब भी नहीं पता, लेकिन उनको इतनी जानकारी है कि अब उनके पिता इस दुनिया में नहीं रहे। महेश के शहीद होने की खबर के बाद ही घर पर लोगों का तांता लगा हुआ है। बच्चे बड़ी गंभीरता से लोगों की बात सुन रहे हैं और यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिरकार ऐसा क्या हुआ, जो उनके घर पर इतनी भीड़ है। महेश का बड़ा बेटा छह साल का है और छोटा चार साल का।

दोनों मासूम पिता की फोटो लिए घर के एक कोने में बैठे हैं और टकटकी लगाए उसे निहार रहे हैं। बच्चों से जब मीडिया के लोगों ने पूछा कि आपके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे तो बच्चों ने सिर हिलाते हुए इस बात की तस्दीक की। बच्चों ने बताया कि उन्हें पता है कि उनके पिता शहीद हो गए हैं और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन आतंकियों को नहीं छोड़ेंगे, जिन्होंने हमला किया। बच्चों का सरकार पर भरोसा और मासूमयित को देखकर हर किसी की आंख भर आती है।

बता दें कि ढाई साल पहले ही नौकरी पाने वाले महेश पर पूरे परिवार का पेट पालने की ज़िम्मेदारी थी। छोटे भाई की पढ़ाई और इकलौती बहन की शादी के साथ ही पत्नी व दो मासूम बच्चों को पालने का ज़िम्मा भी उन्हीं के पास था। दो भाईयों और इकलौती बहन में सबसे बड़े महेश को उनके पिता सुरेश ने ऑटो रिक्शा चलकर पढ़ाया और पाला था। महेश की शहादत के बाद परिवार अब अनाथ हो गया है। परिवार और गांव के लोग पीएम मोदी व उनकी सरकार से महेश की मौत का बदला लेने व आतंकियों और पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिए जाने की मांग कर रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि पीएम मोदी इस बार अपने वायदे को ज़रूर निभाएंगे।