वित्त वर्ष 2017-18 में पब्लिक सेक्टर बैंकों को हर घंटे हुआ 9 करोड़ का नुकसान

नई दिल्ली ( 30 मई ): पब्लिक सेक्टर बैंकों को हर घंटे 9 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। अगर इनका कुल घाटा आंका जाए तो यह 79,000 करोड़ से भी ज्यादा का है। इसके अलावा बैड लोन की कीमत भी वित्त वर्ष 2017-18 में 8.6 लाख करोड़ रुपये है जो कि बैंको के इतिहास में सबसे अधिक है।टाइम्स आॅफ इंडिया की खबर के मुताबिक 2017-18 का वार्षिक बजट ही 24.4 लाख करोड़ का था। मुफ्त एलपीजी देने का खर्चा 13,000 करोड़ का था जबकि कृषि का कुल बजट 58,000 करोड़ का था। सभी केंद्रीय योजनाओं की कुल लागत ही 71 लाख करोड़ के आसपास थी यानी बैंको को हुए घाटे की कीमत देश के बजट से भी ज्यादा है।पिछले साल सरकार ने रीकैपिटलाइजेशन पैकेज 2.11 लाख करोड़ का था जबकि इस वर्ष यह 90,000 करोड़ है। इस घाटे का मतलब यह है कि करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल बैंको की दशा सुधारने और उन्हें कर्ज से उबारने के लिए ही किया जाएगा न कि उनके फायदे में बढ़ोतरी के लिए।पिछले दो सालों से बैंक बैड लोन में रह रहें है। पहला झटका तब लगा जब रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन ने नॉन परफॉर्मिंग असेट के वर्गीकरण को कठिन कर दिया और दूसरा तब जब वर्तमान गर्वनर ने बैंको को सभी रिस्ट्रक्चरिंग स्कीम कैंसल करने का निर्णय दिया था। गौर फरमाने वाली बात यह है कि जहां पब्लिक सेक्टर बैंको को 79,071 करोड़ का घाटा हुआ वहीं प्राइवेट बैंको को 42,000 करोड़ का मुनाफा हुआ।