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करोड़ों लोग हो सकते हैं कैशलेस, पेमेंट के तरीकों में अभी भी हैं कई कमियां

नई दिल्ली(4 दिसंबर):  देश में 50 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। देश में 73 करोड़ डेबिट और क्रेडिट कार्ड हैं। इनके अलावा जिनके पास खाते और इंटरनेट नहीं है उनके लिए भी कैशलेस लेन-देन के तरीके हैं। यानी कम से कम 50 करोड़ लोग तो आज से ही कैशलेस ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। लेकिन कैशलेस के इन तरीकों में कई कमियां भी हैं। 

1. एम वॉलेट: दोस्त भेज सकते हैं पैसा...

- अभी सबसे तेजी से मोबाइल वॉलेट लोकप्रिय हो रहे हैं। इसे डाउनलोड करके अकाउंट से पैसा वॉलेट में भेज सकते हैं।

- पेटीएम, मोबीक्विक, ऑक्सीजन, फ्रीचार्ज आदि लोकप्रिय एम वॉलेट हैं।

- पेटीएम के 16 करोड़ उपभोक्ता हैं। जिसमें 10 लाख से अधिक मर्चेंट्स हैं। वहीं मोबीक्विक के 4 करोड़ यूजर्स हैं।

- इनकी बड़ी खूबी है कि आपके मित्र भी आपके वॉलेट में पैसा ट्रांसफर कर सकते हैं। मूवी टिकिट, बिल पेमेंट और शॉपिंग आदि पर 50% तक डिस्काउंट और कैशबैक।

- एम वॉलेट में बैलेंस कम होता है इसलिए फ्रॉड की स्थिति में कम नुकसान।

खामी: बड़े ट्रांजैक्शन नहीं

- बिना केवायसी के महीने में अलग-अलग कंपनियों में अधिकतम 20-25 हजार रु.तक के पेमेंट हो सकते हैं।

- केवाएसी के साथ एक लाख रुपए का पेमेंट हो सकता है।

- बड़े ट्रांजैक्शन नहीं हो सकते। इसलिए युवाओं और छोटे लेन-देन के लिए ही ज्यादा काम का।

2. बैंकिंग ऐप: मैसेज-ईमेल जैसी बैंकिंग

- लगभग सभी बैंकों के ऐप आ गए हैं। यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस)भी एक इंटरफेस है।

- 12 करोड़ से अधिक लोग देश में मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं। यूपीआई ऐप को भी 20 लाख लोगों ने डाउनलोड किया है।

- इससे आसानी से पैसों का लेन-देन कर सकते हैं। एसबीआई बड़ी लोकप्रिय ऐप है। मनी ट्रांसफर से लेकर ऑन लाइन खरीदी तक में आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

- यूपीआई जैसे ऐप से केवल एक आईडी के माध्यम से ट्रांजेक्शन कर सकते हैं। अभय (आईडीबीआई) जैसे ऐप मोबाइल से ही कार्ड को ब्लॉक-अनब्लॉक करते हैं।

- कई दूसरे ऐप से सिर्फ आईएफएससी कोड और अकाउंट नंबर से ही तुरंत पैसा ट्रांसफर हो जाता है।

खामी: पेमेंट में परेशानी

- यूपीआई से सिर्फ पर्सन टू पर्सन या अकाउंट टू अकाउंट लेन-देन हो सकता है। फिजिकल शॉपिंग, बिल भुगतान के ऑप्शन्स कम।

- फेस टू फेस पेमेंट या दुकानदार को पेमेंट ऐप के जरिए सिर्फ क्यूआर कोड से ही हो सकेगा।

3. प्री पेड कार्ड: खाता नहीं तो भी पैसा

- सबसे बड़ी खासियत है कि बैंक अकाउंट न होने पर भी इन्हें इस्तेमाल किया जा सकता है।

- बैंक लिंक्ड कार्ड का प्रयोग फिर डेबिट कार्ड की तरह किया जा सकता है।

- नौकरीपेशा लोगों के लिए संस्थान से अनुबंध कर पेरोल कार्ड और विदेश से भारत में आने वाले पर्यटकों को पैसे की परेशानी से बचाने के लिए भी आईएनआर कार्ड जारी किया जाता है।

- 12 करोड़ ग्राहक हैं इट्ज कैश के। नोटबंदी से 50% वैल्यू ट्रांजेक्शन बढ़े हैं। रोज 60 से 70 करोड़ रु के ट्रांजेक्शन हो रहे हैं।

खामी: एक दायरे तक इस्तेमाल

- इट्ज कैश में 50 हजार रु तक बैलेंस रखा जा सकता है। कई कार्ड में मैक्सिमम लिमिट एक लाख रु. है।

- कई कार्ड केवल शॉपिंग तक लिमिटेड है।


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