रियो ओलंपिक: एक नजर योगेश्वर दत्त के सफर पर

नई दिल्ली(19 अगस्त):  3 साल के योगेश्वर दत्त हरियाणा के सोनीपत जिले में पैदा हुए। फ्री-स्टाइल रेसलर योगेश्वर रियो ओलंपिक में भारत के लिए 65 किलोग्राम भारवर्ग में मैट पर उतरेंगे। 8 साल से कुश्ती कर रहे योगेश्वर इस साल भी पदक की उम्मीद लगाए बैठा है। देश के लिए पदक के प्रमुख दावेदारों में योगी का नाम भी शामिल हैं।

जानिए क्या है योगेश्वर की बड़ी उपलब्धियां

- योगेश्वर ने 2012 के लंदन ओलंपिक में 60 किलोग्राम भारवर्ग में भारत के लिए कांस्य पद जीता था। फ्री-स्टाइल कुश्ती में पदक जीतने वाले वो दूसरे पहलवान बने। 2008 के बीजिंग ओलंपिक में भी योगेश्वर ने शिरकत की थी, मगर वो क्वार्टरफाइनल में हारकर बाहर हो गए थे।

- योगेश्वर ने 2014 में हुए इंचियोन एशियन खेलों में देश के लिए सोने का तमगा जीता। उन्होंने 65 किलोग्राम भारवर्ग में भारत को गोल्ड दिलाया। इससे पहले योगेश्वर ने 2006 के दोहा एशियन गेम्स में 60 किलो भारवर्ग में कांस्य जीता।

- योगेश्वर 2012 में भी देश का झंडा बुलंद किया। इस साल गुमी में हुई एशियाई रेसलिंग चैंपियनशिप में योगेश्वर ने गोल्ड जीता था। इस बार उन्होंने 60 किलोग्राम भार वर्ग में भाग लिया था।

- योगेश्वर कॉमनवेल्थ खेलों में देश के लिए सबसे सफल पहलवानों में से एक हैं। योगेश्वर दत्त ने 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों में 60 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड जीता था। इसके बाद 2014 ग्लास्गो कॉमनवेल्थ खेलों में 65 किलोग्राम भारवर्ग में उतरकर भी योगेश्वर ने गोल्ड जीता।

कॉमनवेल्थ रेसलिंग चैंपियनशिप

इस प्रतियोगिता में योगेश्वर की तूती बोलती है। लंदन में 2007 में योगेश्वर ने एक गोल्ड और एक सिल्वर, 2005 में केप टाउन में एक गोल्ड और एक सिल्वर जीता। इसके अलावा 2003 में भी वो गोल्ड मेडल जीतने में सफल रहे थे।

- इसके अलावा योगेश्वर को 2012 में राजीव गांधी खेल रत्न भी दिया गया था। साथ ही योगेश्वर को साल 2013 में पद्मश्री पुरस्कार भी दिया जा चुका है।