मौत के बाद भी पढ़ाते रहेंगे शरीर के दानी प्रोफेसर मोहनलाल बोहरा

नई दिल्ली (10 सितंबर):  राजस्थान की धरा पर भामाशाह जैसे दानियों ने जन्म लिया है। ऐसा ही एक दानी जालोर में भी हुआ। जिसने अपनी जीवन भर की कमाई लोगों की भलाई के लिए दान कर दी और तो और मरने के बाद शरीर भी दान कर दिया।

- शरीर के दानी  प्रोफेसर मोहनलाल बोहरा का शुक्रवार को यहां निधन हो गया।

- उनका शव श्मशान घाट के बजाय जोधपुर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया।

- जहां मेडिकल के छात्र अब उनके शरीर से मानव शरीर संरचना का पाठ सीखा करेंगे। 

- करीब डेढ़ साल पूर्व बोहरा ने अपने जीवन की सारी कमाई शहर में नेत्र चिकित्सालय के लिए दान कर दी थी।

- बोहरा का कहना था कि जीवन में प्रत्येक वस्तु और द्रव्य का उतना ही उपयोग होना चाहिए जितनी जरूरत है।

- इसी भावना से करीब दो साल पूर्व उन्होंने मकान सहित शिवाजी नगर स्थित दो प्लॉट बेचकर उस राशि का उपयोग नेत्र चिकित्सालय के लिए किया।

- सम्पूर्ण संपति बेचने के बाद बोहरा स्वयं ऋषभनगर के एक किराए के मकान में रह रहे थे।

- बोहरा जयपुर यूनिवर्सिटी से एसएससी (फिजिक्स) करने के बाद उदयपुर यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रहे थे।

- उदयपुर यूनिवर्सिटी में कार्यकाल के दौरान वे घर से कॉलेज तक रोजाना साइकिल पर ही जाते थे।