भारत से ऐसे अलग है अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव, ये है पूरी प्रक्रिया

वाशिंगटन (3 फरवरी): अमेरिका की हवा में राष्ट्रपति के चुनाव की गर्मी घुल गई है। प्रचार की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। हालांकि ये चुनाव नवंबर के महीने में होने हैं। लेकिन इसकी तैयारी करीब एक साल पहले से ही अपने चरम पर है। बता दें कि यह चुनाव भारत में होने वाले चुनाव से बेहद अलग और पेचिदा है। अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया को लेकर ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब आपको नहीं पता होंगे।   कैसे होता है 'वर्ल्ड पावर' के राष्ट्रपति का चुनाव अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव कई चरणों में होता है जिसकी प्रक्रिया के बारे में वहां के संविधान के अनुच्छेद 2 में बताया गया है। हर चार साल में एक बार होने वाले इस चुनाव में दो पार्टियां अपनी दावेदारी पेश करती हैं। 

दो साल पहले शुरू होता है पहला चरण चुनाव के लिए राष्ट्रपति बनने का ख्वाब देखने वाले उम्मीद्वार एक समिति बनाते हैं। यह समिति चुनाव के लिए चंदा इकट्ठा करती है। साथ ही लोगों के मन को भांपने का काम करती है। यह काम चुनाव से दो साल पहले ही शुरू हो जाता है। हालांकि औपचारिक तौर पर चुनावी प्रक्रिया 'प्राइमरी' स्टेज से शुरू होती है। इसके तहत छह महीने के अंदर पार्टी अपनी तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीद्वारों की सूची जारी करती है। इसके बाद अमेरिका के 50 राज्यों के वोटर्स पार्टी प्रतिनिधि (पार्टी डेलीगेट) चुनते हैं। 

दूसरे चरण में होता है नामांकन दूसरे चरण में प्राइमरी में जिन लोगों का चयन किया जाता है वो पार्टी कन्वेंशन में हिस्सा लेते हैं। वहां पर यही चुने हुए प्रतिनिधि राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का चुनाव करते हैं। इस फेज में नामांकन की प्रक्रिया होती है।

तीसरे चरण में शुरू होता है चुनाव प्रचार तीसरे चरण में चुनाव प्रचार शुरू होता है। इसमे पार्टी उम्मीदवार जनता का समर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं। उम्मीदवार टेलीविजन के माध्यम से कई मुद्दों पर बहस भी करते हैं। इतना ही नहीं अमेरिका में भी चुनाव प्रचार के अंतिम हफ्तों में उम्मीदवार अपना पूरा ध्यान स्विंग स्टेट्स पर लगा देते हैं, ये ऐसे मतदाता होते हैं जो किसी भी पक्ष की तरफ जा सकते हैं।

अंतिम चरण में इलेक्टोरल कॉलेज करता है मतदान यह चौथा और चुनाव प्रक्रिया का अंतिम चरण होता है। इसमें इलेक्टोरल कॉलेज राष्ट्रपति पद के लिए मतदान करता है।

क्या होता है इलेक्टर और इलेक्टर कॉलेज राज्यों के मतदाता इलेक्टर चुनते हैं। ये इलेक्टर राष्ट्रपति पद के किसी न किसी उम्मीदवार के समर्थक होते हैं। इलेक्टर चुनने के बाद जनता का काम खत्म हो जाता है। मतलब चुनाव में जनता की भागेदारी यहीं तक सीमित है। ये इलेक्टर मिलकर ही इलेक्टोरल कॉलेज बनाते हैं। यही इलेक्टोरल कॉलेज राष्ट्रपति का चुनाव करता है। इलेक्टोरल कॉलेज में 538 सदस्य होते हैं। आपको बता दें कि अमेरिका में राष्ट्रपति बनने के लिए कम से कम 270 इलेक्टोरल वोट जरुरी होते हैं।

अमेरिकी संसद का नंबर गेम हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव (प्रतिनिधि सभा) में 435 सदस्य होते हैं, जबकि सीनेट में 100 सदस्य बैठते हैं। इन दोनों सदनों को मिलाकर संख्या होती है 535। इसके बाद अमेरिका के 51वें राज्य कोलंबिया से तीन सदस्य आते हैं। यानी इसको मिलाकर 538 इलेक्टर्स अमेरिकी राष्ट्रपति को चुनते हैं।

किस दिन होता है अमेरिका में चुनाव अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव का दिन भी बेहद खास होता है। चुनावी साल के दौरान नवंबर महीने में पड़ने वाले पहले सोमवार के बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार को मतदान होता है।

कौन बन सकता है अमेरिका का राष्ट्रपति > जन्म अमेरिका में हुआ हो साथ ही वो अमेरिकी नागरिक ही हो। > 35 साल की आयु पूरा कर चुका हो। > लगातार 14 सालों से अमेरिका में रह रहा हो। > अंग्रेजी की जानकारी होना अनिवार्य।