विचार: राम रहीम फैसला और हरियाणा की खट्टर सरकार

प्रियंका चतुर्वेदी, मुंबई: जो इस्तीफा मांगता है, वो मांगता रहे, हमने अपना काम अच्छी तरह किया था। ये शब्द हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिलने के बाद थे। खट्टर का ये बयान सत्ता का घमंड दर्शाता है। वो सरकार जो मैक्सिमम गर्वनेंस और उत्तरदायित्व के विश्वास पर सत्ता में आई थी, वो सत्ता में आते ही बदल गई। चाहे वो सुरेश प्रभु हों, जिनकी 2014 से हो रहे रेल हादसों में जा रही लोगों की जान, गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी के कारण बच्चों की मौत को लेकर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ हों या छत्तीसगढ़ जहां के सरकारी अस्पताल में 800 बच्चों की मौत हुई हो। इन सभी मामलों में सरकार की कोई जवाबदेही नहीं। 

हरियाणा में बाबा राम रहीम पर फैसला आने के बाद जो हुआ वो खट्टर सरकार की असफलता है। बीजेपी के कार्यकाल में हरियाणा में लोगों की जिदंगी और संपत्ति को नुकसान पहुंचा है, लेकिन सरकार को इसका कोई पश्चतावा नहीं है। चाहे वो जाट आंदोलन हो, जिसमें लूट, हत्या और 2 दर्जन से ज्यादा लोगों की जान गई, और 5000 करोड़ संपत्ति को नुकसान पहुंचा, या हरियाणा के हिसार में बरवाला स्थित संत रामपाल के आश्रम को खाली कराना हो, इन सभी मामलों में सरकारी तंत्र पूरी तरह से फेल रही। लोगों की जिंदगी की कीमत पर वोटों को प्राप्त करना बीजेपी सरकार का एकमात्र मापदंड है। अगर किसी को महिलाओं की सुरक्षा के खराब ट्रैक रिकॉर्ड को देखना हो, तो इसके लिए एक पूरा लेख होगा। 

वर्तमान संकट के कारणों पर एक संक्षिप्त पृष्ठभूमि: डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख पर 1999 में एक साध्वी से रेप का आरोप लगा। साल 2002 में सीबीआई ने इसको लेकर जांच शुरू की। 2002 में सीबीआई ने डेरा प्रमुख राम रहीम के खिलाफ गुमनाम चिट्ठी को लेकर 2 साध्वियों से यौन शोषण का मामला दर्ज किया। मामले की सुनवाई 2007 से चल रही और पंचकूला की सीबीआई की विशेष अदालत ने 17 अगस्त को सुनवाई पूरी की और फैसले की तारीख 25 अगस्त रखी। 

फैसला आने के पहले पंचकूला में राम रहीम के भक्तों के जमावड़े को हरियाणा सरकार ने नजरंदाज कर दिया और धारा 144 लागू होने के बावजूद कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोई ठोस इंताजम नहीं किया। यहां तक कि वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री रामविलास शर्मा ने कहा कि भक्तों की आस्था पर धारा 144 लागू नहीं होता। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इसके बाद सख्त रुख अपनाया और कहा कि हम ठोस कार्रवाई चाहते हैं और यह राज्य के किसी भी आदेश में दिखाई नहीं दे रहा है। यह वास्तव में निराशाजनक है। और यही जाट आंदोलन के दौरान हुआ था। आप उनको प्रोत्साहित कर रहे हैं। कहां है वो आदेश जो पांच और उससे ज्यादा लोगों के एकत्रित होने पर पाबंदी लगाता है। हमने आपको आदेश प्राप्त करने के लिए कहा था। आप तब स्थिति की गंभीरता पर केंद्र के सामने रोते हैं लेकिन ऐसे हालात बनाया कौन। इतना ही नहीं, डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर फैसले के पहले हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय को हरियाणा के लिए आवश्यक अर्धसैनिक बलों की तैनाती के लिए निर्देश जारी किया था। सीबीआई की विशेष अदालत द्धारा राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद 35 लोगों की मौत हुई और संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। इसके बाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए हरियाणा सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने राजनीतिक फायदे के लिए पंचकूला को जलने दिए। 

बीजेपी अध्यक्ष ने फैसले के खिलाफ बोलकर एक संकेत दिया। सांसद साक्षी महराज ने इसको हिंदू-मुस्लिम मुद्दा बनाते हुए पीड़ित महिलाओं पर ही आरोप लगा दिया और कहा कि राम रहीम पर झूठा आरोप लगाकर उनको फसाया गया है। खट्टर का इस्तीफा नहीं देना शासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को लेकर बीजेपी की शून्य प्रतिबद्धता का संकेत है। 

(प्रियंका चतुर्वेदी कांग्रेस प्रवक्ता हैं और ये उनके निजी विचार हैं)