लोगों की मौत और नौकरी जाने का जश्न मना रहे हैं PM मोदी- प्रियंका चतुर्वेदी

प्रियंका चतुर्वेदी, नई दिल्ली (7 नवंबर): 8 नवंबर को नोटबंदी के एक साल पूरे हो जाएंगे। बीजेपी इस दिन को 'एंटी ब्लैक मनी डे' के रुप में मनाएगी। इस दिन प्रधानमंत्री ने 86 फीसदी मुद्रा को सर्कुलेशन से हटाकर देशभर में अराजकता फैला दी। इस फैसले का कोई भी ठोस नतीजा नहीं मिला। ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि नीति की विफलता को स्वीकार करने और सुधारात्मक उपाय करने के बजाय वह इस दिन जश्न मनाने की तैयारी में हैं।

प्रधानमंत्री की असफल नीति की वास्तविकता सभी को देखने के लिए है। वित्त मंत्री की ओर से यह उल्लेख किया गया कि नोटबंदी के 8 महीने बाद 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की मुद्रा बैंकों में वापस नहीं आएंगे। जबकि 99 प्रतिशत प्रतिबंधित किए गए कैश कानूनी तौर पर बैंक में वापस आ जाएंगे। जो एक प्रतिशत आरबीआई को वापस नहीं मिले हैं वो करीब 16,000 करोड़ हैं। तो इससे साफ है कि बहुत कम रकम कैश के रुप में रखा गया था। जैसा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी कह चुके हैं कि सभी कैश काला धन नहीं होता और सभी काले धन कैश नहीं होते।

नवंबर के अपने संबोधन में पीएम मोदी ने नोटबंदी को किस मकसद से लागू किया, इसको बताने में वह असफल रहे। हमने देखा कि कैसे इसको सही बताने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पहला था कि कैसे देश डिजिटल इकॉमनी की ओर बढ़ेगा। वित्त मंत्रालय ने दावा किया कि अक्टूबर 2016 से मई 2017 के बीच लेनदेन में 56 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। ये आंकड़े 71.27 करोड़ से 111.45 करोड़ तक जाते हैं। लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 2 अगस्त को लोकसभा में माना कि नवंबर-दिसंबर 2016 के बीच डिजिटल लेनदेन में बढ़ोतरी हुई। तो ये साफ है कि लोगों के पास जब कैश नहीं था तो वे डिडिटल पेमेंट की ओर रुख किए। वे कुछ हद तक इसे करने के लिए आदी तो हुए, लेकिन पुरानी आदतों पर फिर वापस आ गए। हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू द्वारा आयोजित एक अध्ययन में उन्होंने 42 देशों की रैंकिंग तैयार की। ये रैंकिंग ऑनलाइन स्थानांतरित करते समय गति, गुणवत्ता और आसानी को ध्यान में रखते हुए की गई। इसमें भारत को 41वां स्थान मिला, जो पाकिस्तान से एक स्थान ऊपर है।

द टाइम्स ऑफ इंडिया में लिखे एक कॉलम में एमजे अकबर ने जन धन योजना खाते के जीरो बैलेंस में गिरावट सुनिश्चित करने के लिए नोटबंदी को श्रेय दिया। लेकिन वह ये बताना भूल गए कि नोटबंदी के ऐलान के कुछ हफ्ते पहले ही जीरो बैलेंस जन धन योजना का अनुपात 26 सितंबर 2016 तक पहले ही 24.1% तक गिर गया था। दरअसल, नोटबंदी के बाद जीरो बैलेंस खातों में 24.1% से 21.4% की कमी आई है, जो 2014 के बाद से सबसे धीमी है। अमित शाह ने अपने भाषणों में कहा था कि मौद्रिकरण से अनौपचारिक अर्थव्यवस्था औपचारिक अर्थव्यवस्था के मुकाबले आगे बढ़ गई है।

वित्त मंत्री ने बताया कि नोटबंदी के बाद टैक्सपैयर्स की संख्या में इजाफा हुआ, हालांकि पिछले 15 सालों के हिसाब से जिस तरह से सरकार को टैक्सपैयर्स से पैसा मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला है। लेकिन उन रिटर्न में दर्ज की जाने वाली औसत कर योग्य आय 2.7 लाख है, जो कि कालाधन की दहलीज से कम है।

यह वास्तव में पूछने लायक है कि सरकार वास्तव में क्या मना रही है। वह लाखों नौकरियां जो चली गईं या जो कि मुद्रा बदलने के लिए कतार में इंतजार करने के दौरान अपनी जिंदगी खो दिए। सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर दो प्रतिशत अंक गिर गई, नौकरियों का सफाया हुआ, एक आर्थिक अराजकता, आतंकवादी गतिविधियों का कोई अंत नहीं है, आंतरिक या बाहरी और नकली नोट अभी भी प्रचलन में हैं। पीएम को राष्ट्र को इन सभी चीजों का जवाब देना होगा। एक बुरे आर्थिक कदम का उत्सव निश्चित रूप से जवाब नहीं है।


(प्रियंका चतुर्वेदी कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता है। ये उनके निजी विचार हैं।)