18 साल की उम्र में पृथ्वी शॉ का 'विराट' टेस्ट डेब्यू, पिता ने बेटे के सपनों को ऐसे दिया पंख

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली ( 4 अक्टूबर ): भारत और वेस्टइंडीज के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज की गुरुवात को शुरुआत हो गई। भारत और वेस्टइंडीज का पहला मुकाबला राजकोट के सौराष्ट्र क्रिकेट संघ स्टेडियम में खेला जा रहा है। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने खबर लिखने तक 1 विकेट गंवा कर 201 रन बना लिए थे। पृथ्वी शॉ (109 रन) और चेतेश्वर पुजारा (85 रन) क्रीज पर थे।पृथ्वी शॉ ने अपने डेब्यू टेस्ट मैच में ही शानदार शतक जड़ दिया है। वह डेब्यू टेस्ट में शतक लगाने वाले भारत के सबसे युवा बल्लेबाज हैं। पृथ्वी ने 99 गेंदों में अपना पहला टेस्ट शतक लगाया है। इसके अलावा पृथ्वी डेब्यू मैच में सबसे तेज शतक जड़ने वाले तीसरे बल्लेबाज बन गए हैं। पृथ्वी शॉ से आगे टीम इंडिया के खिलाड़ी शिखर धवन और वेस्टइंडीज के ड्वेन स्मिथ हैं। स्कूल क्रिकेट से लेकर आईपीएल तक पृथ्वी शॉ ने शानदार प्रदर्शन किया है और टेस्ट डेब्यू में भी उनकी दमदार बल्लेबाजी देखने को मिली।18 साल के पृथ्वी शॉ ने रणजी ट्राॅफी और दलीप ट्राॅफी में भी कई रिकॉर्ड बनाए हैं। दलीप ट्राॅफी डेब्यू में शतक लगाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने। इससे पहले यह रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम था।

पृथ्वी शॉ बचपन से ही काफी मेहनती रहे हैं। ऐसे में बच्चों के सपनों में मां-बाप का भी शामिल होना भी जरूरी होता है। जब पृथ्वी 4 साल के थे तभी उनकी मां निधन हो गया था जब वह 4 साल के थे। इसके बाद पिता ने मां की भी सारी जिम्मेदारियां निभाईं। उनके करियर के लिए पिता पंकज शॉ ने बहुत बलिदान किया। ट्विटर पर उनके फैन्स कई तरह के वीडियो शेयर कर रहे हैं। इनमें से एक वीडियो में पृथ्वी शॉ साइकिल से जा रहे हैं और पीछे-पीछे उनके पिता जी बाइक चला रहे हैं।पृथ्वी शॉ कहते हैं, 'मैं सुबह शाम प्रैक्टिस करता हूं और डैडी सुबह से शाम तक मेरे पीछे रहते हैं।' बीच में पृथ्वी के परिवार की आर्थिक हालत खराब हो गई थी। पिता का बिजनेस ठप हो गया था, लेकिन जब उन्हें स्कॉलरशिप मिलने लगी तो इनकी आर्थिक हालत सुधरी। इस मामले में पृथ्वी शॉ लकी रहे कि पिता ने उनके सपने को पंख दिए। अभ्यास मैच के दौरान उनके पिता ने गेंदबाज की भी भूमिका निभाई।एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अंजिक्य रहाणे ने भी उनकी प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा, 'मैंने उन्हें करियर की शुरूआत से देखा है। हम साथ में अभ्यास करते थे। वह आक्रामक सलामी बल्लेबाज हैं और भारत A के लिए अच्छा खेलने का फल उन्हें मिला है।'