20 फिट की दिवार फांद भाग गया कैदी...

भूपेंद्र सिंह, अहमदाबाद (26 जुलाई): राज्य की सबसे ज्यादा सुरक्षित मानी जाने वाली साबरमती मध्यस्थ जेल से दिन-दहाड़े हत्या मामले का एक विचाराधीन 20 साल के कैदी प्रविण उर्फ भोलो धवल के फरार हो जाने की चौंकाने वाली घटना सामने आई है। ये पहली घटना है, जब कोई कैदी जेल से फरार होने में सफल हुआ है।

घटना रविवार को भरी दोपहरी एक बजे के करीब साबरमती मध्यस्थ जेल की नई जेल स्थित आसन गेट बैरेक के पास हुई। आरोपी कैदी नंबर 5171 प्रवीण इस बैरेक के ठीक सामने की अंदरूनी 15 फीट दीवार पर चढ़ा और इस दीवार पर लगे लोहे के सरियों की मदद से बाहरी 20 फीट ऊंची मुख्य दीवार तक पहुंच गया। इसके बाद आरोपी ने मुख्य 20 फीट ऊंची दीवार पर लगे करीब तीन से साढ़े तीन फुट ऊंचे बिजली के करंट वाले तारों की फेंसिंग पर हाथ रखकर ये भी देखा कि करंट आ रहा है या नहीं। उसे पर्याप्त करंट मालूम नहीं हुआ, जिससे वह जेल की मुख्य दीवार को पिलर नंबर 83 व 84 के बीच के भाग से कूद कर फरार हो गया।

जेल अथॉरिटी को धवल के भाग जाने के बारे में शाम 4 बजे पता चला, जब कैदियों को रोल कॉल के जरिए बैरकों में वापस भेजा जा रहा था। धवल के वहां न होने के बाद जेल अधिकारी हरकत में आए। इस घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज भी सामने आए हैं। और सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दिया कि धवल पहले बैरक के सामने वाली 15  फुट ऊंची दीवार पर चढ़ रहा था। इतना करने में उसे करीब 4 मिनट का समय लगा।

जेल की मुख्य दीवार के जिस पिलर नंबर के पास से आरोपी फरार हुआ, इसी के पास ठीक करीब सौ से डेढ़ सौ मीटर दूरी पर जेल वॉच टावर भी है। जहां 24 घंटे हथियारधारी सुरक्षाकर्मी तैनात रहता है। रविवार दोपहर जब कैदी प्रविण फरार हुआ उस दौरान भी इस वॉच टावर पर एसआरपी ग्रुप-17 सी कंपनी का कांस्टेबल जयराज सिंह कुंपावत ड्यूटी पर था, लेकिन वह दिन में भी ड्यूटी पर सो रहा था। ड्यूटी में लापरवाही बरतने के चलते एसआरपी कांस्टेबल जयराज सिंह कुंपावत को भी इस मामले में आरोपी बनाते हुए उसे निलंबित भी कर दिया गया है। साबरमती जेल से कैदी के फरार हो जाने की घटना की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच अहमदाबाद शहर क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। जेल प्रशासन की ओर से राणिप पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।

साबरमती सेन्ट्रल जेल में गोधराकांड, अहमदाबाद बंब ब्लास्ट सहित कई संवेदनशील मामलों से संबंधित कैदी बंद हैं। यह जेल दो हिस्से में बंटा है। एक में दोषी कैदी रहते हैं, जबकि दूसरे में अंडर ट्रायल कैदियों को रखा जाता है। इन कैदियों के जेल के बाहरी दीवार में बिजली के तार लगे हैं, जिसमें करंट दौड़ता है। 2013 में सीरियल ब्लास्ट केस के आरोपी 213 फीट लम्बी सुरंग बनाकर भागने के फिराक में थे, लेकिन समय रहते उन्हें दबोच लिया गया था।

धवल को अहमदाबाद के सरदारनगर इलाके में मर्डर के आरोप में 16 जून को जेल भेजा गया था। इस जुर्म में उसके पिता पुरुषोत्तम धवल भी साथ थे, जो जेल में ही हैं और मां आशा को कुछ दिन पहले से ही बेल मिली। धवल की पत्नी गायब है और शक है कि धवल के साथ ही होगी। अबतक की जांच में यह पता चला है कि वारदात के दो दिन पहले धवल की पत्नी उससे मिलने जेल पहुंची थी और एक रोज पहले धवल ने जेल पीसीओ से पत्नी से बात की थी। जेल अधिकारी इस बात की जांच करने में जुटे हैं कि जेल से भागने में धवल को जेल में ही किसी से मिली या उसकी पत्नी या किसी और से। इस मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच ने अलग-अलग अस्पतालों में धवल की तलाश के लिए चार टीमें बनाई गईं हैं। संभव है इतनी ऊंची दीवार फांदने में उसे चोटें आईं हों और वह किसी अस्पताल गया हो।