5 मुलाकातें : जानिए कब-कब मिले पीएम मोदी-नवाज शरीफ और क्या रहे नतीजे

नई दिल्ली (6 सितंबर): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर पाकिस्तान जा सकते हैं। सूत्रों  से मिली जानकारी के अनुसार वह नवंबर में पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इससे पहले भी पीएम मोदी और नवाज शरीफ की पांच बार मुलाकात हो चुकी है। साल 2004 के बाद भारतीय प्रधानमंत्री की पहली पाकिस्तान यात्रा थी।

हम आपको इन मुलाकातों और उनके नतीजों के बारे में बता रहे हैं...

पहली बार मिले थे दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से पहली मुलाकात दिल्ली में हुई थी। मौका था पीएम मोदी के शपथग्रहण समारोह का। इसके लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री समेत दक्षेस नेताओं को निमंत्रण भेजा गया था। पीएम मोदी और शरीफ के बीच शपथग्रहण समारोह के अगले दिन 27 मई 2014 में को बातचीत हुई थी।

नतीजा : पीएम मोदी ने पाक पीएम नवाज शरीफ के समक्ष आतंकवाद के संबंध में भारत की चिंता व्यक्त करते हुए कहा थी कि पाकिस्तान को अपनी सरजमीं से और अपने कब्जे वाले क्षेत्र से आतंकवाद को रोकने की प्रतिबद्धता का पालन करना चाहिए। पीएम मोदी ने यह भी उम्मीद जताई थी कि मुंबई आतंकवादी हमले के मामले में पाकिस्तान में मुकदमे की गति तेज करने के लिए और आरोपियों को दंडित कराने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। हालांकि बाद में पाक ने इस पर कुछ खास नहीं किया।

दूसरी मुलाकात काठमांडू में पीएम मोदी और नवाज शरीफ के बीच दूसरी मुलाकात नवंबर, 2014 में नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित सार्क शिखर सम्मेलन में हुई थी। यह सम्मेलन पाकिस्तान द्वारा भारत समर्थित प्रस्तावों को ठुकराने की वजह से नाकाम माना जाने लगा था। हुआ यह था कि पीएम मोदी और शरीफ ने सम्मेलन शुरू होने के बाद से ही न सिर्फ एक-दूसरे से दूरी बनाए रखी, बल्कि आमना-सामना होने के बावजूद एक-दूसरे से नजरें बचाते भी दिखे थे। बाद में सार्क सम्मेलन की समाप्ति पर काठमांडू के बाहर धुलीखेल में आयोजित अनौपचारिक रिट्रीट के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने हाथ मिलाकर एक-दूसरे का अभिवादन जरूर किया, लेकिन सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच किसी तरह की कोई बातचीत नहीं हुई।

परिणाम : सम्मेलन असफल रहने की खबर के बीच आंतरिक तौर पर पीएम मोदी और शरीफ की मुलाकात के प्रयास किए गए। दरअसल भारत ने सार्क देशों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, जिसका पाकिस्तान ने विरोध किया था। पाक पीएम नवाज शरीफ की दलील थी कि इस मुद्दे पर उन्होंने अपने मुल्क में उचित चर्चाएं नहीं की हैं। बाद में पीएम मोदी और शरीफ की मुलाकात के बाद सार्क शिखर सम्मेलन को कुछ हद तक सफलता मिली, जब सभी सदस्य देशों के बीच हुए ऊर्जा समझौते पर पाकिस्तान ने भी दस्तखत कर दिए।

तीसरी मुलाकात रूस के ऊफा में जुलाई 2015 में रूस के उफा शहर में हुए शंघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) के सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच मुलाकात हुई। यह मुलाकात तय समय से ज्यादा करीब 1 घंटा तक चली थी। इस द्विपक्षीय बातचीत में संबंधों को आगे ले जाने के लिए कई कदम उठाने का फैसला किया था। पीएम मोदी और शरीफ के बीच अब तक हुई मुलाकातों में यह एक ऐसी मुलाकात रही, जिसमें कई मुद्दों पर सहमति बनी।

परिणाम : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों की निंदा की और इस बुराई से निपटने के लिए कदम उठाने का निर्णय लिया। इसके साथ ही सार्क सम्मेलन के लिए पीएम मोदी को नवाज शरीफ ने न्योता भी दिया और पीएम मोदी ने भी पाकिस्तान जाने पर सहमति जताई। इन मुद्दों पर बनी सहमति- दोनों पक्ष सभी लंबित मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हुए।

चौथी बार पेरिस में मिले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ से चौथी मुलाकात नवंबर, 2015 में पेरिस में हुई। दरअसल पीएम मोदी पेरिस में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पेरिस गए थे। पीएम मोदी और शरीफ ने कॉन्फ्रेन्स सेंटर की लॉबी में हाथ मिलाए और फिर सोफे पर बैठ गए, जहां उन्हें बातचीत करते देखा गया। दोनों के बीच यह मुलाकात जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर चल रही संयुक्त राष्ट्र समिट के इतर हुई थी।

नतीजा : दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच हुई इस बातचीत का कोई ब्योरा उपलब्ध नहीं हो पाया। हालांकि ऐसा माना जाता है कि शांति प्रक्रिया की दिशा इसी बैठक से तय हुई है।

5वीं मुलाकात, जो लाहौर में हुई वह पूर्व निर्धारित नहीं थी और अचानक ही पीएम मोदी की अफगानिस्तान यात्रा के दौरान तय हो गई। इस मुलाकात का ज्यादा ब्योरा नहीं मिल पाया है, लेकिन जो जानकारी मिली उसमें पहली मुलाकात की तरह ही भावुकता का पुट रहा। पीएम मोदी ने नवाज के परिवार से मुलाकात की। उनकी मां का आशीर्वाद लिया और नातिन को शादी की बधाई दी।

नतीजा: सूत्रों के अनुसार अब भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की 15 जनवरी को इस्लामाबाद में बैठक होगी। हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। उम्मीद की जा रही है कि पीएम की यात्रा से भारत-पाक संबंधों पर जमी बर्फ और पिघलेगी और कुछ हद तक शांति स्थापित हो सकेगी।