केजरीवाल के 21 विधायकों की सदस्यता पर लटकी तलवार

नई दिल्ली (14 जून): दिल्ली की केजरीवाल सरकार को बहुत बड़ा झटका लगा है। कल राष्ट्रपति ने केजरीवाल के संसदीय सचिव विधेयक को खारिज कर दिया। राष्ट्रपति के इस कदम के बाद अब आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों की सदस्यता पर तलवार लटक गई है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली सरकार के संसदीय सचिव विधेयक को खारिज कर दिया है। जिसके बाद केजरीवाल की पार्टी के 21 विधायकों की सदस्यता खतरे में पड़ गई है।

दिल्ली में सरकार बनने के बाद केजरीवाल दिल्ली विधानसभा में एक प्रस्ताव पास किया था। जिसमें इन विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त किए जाने पर लाभ का पद यानी ऑफिस ऑफ प्रोफिट नहीं मानने की बात थी। बीजेपी और कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल अपने विधायकों को फायदा देने के लिए ऐसा कर रहे हैं। जिसके बाद चुनाव आयोग ने भी सफाई मांगी थी। 

21 आप एमएलए को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी बनाए जाने के खिलाफ प्रशांत पटेल नाम के शख्स ने राष्ट्रपति के पास एक अर्जी दी थी। जिसमें विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई थी। राष्ट्रपति ने ये अर्जी चुनाव आयोग को भेजते हुए कार्रवाई करने को कहा था। जिसके बाद चुनाव आयोग ने आप के सभी 21 विधायको को मार्च में नोटिस भेजा था।

बिल के खारिज होते ही केजरीवाल ने केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोल दिया। अपने ट्वीट में केजरीवाल ने इस फैसले पर कड़ा एतराज जताते हुए लिखा कि दिल्ली में हो रहे अच्छे कामों से मोदी जी घबरा रहे हैं। एक MLA बेचारा रोज़ अपना पेट्रोल ख़र्च करके अस्पतालों के चक्कर लगाता था। बताओ क्या ग़लत करता था? मोदी जी ने उसको घर बिठा दिया। एक MLA को बिजली पे लगा रखा था, एक को पानी पे, एक को अस्पतालों पे, एक को स्कूल पे। मोदी जी कहते हैं - ना काम करूँगा, ना करने दूँगा। मोदी जी लोक तंत्र का सम्मान नहीं करते। डरते हैं तो सिर्फ़ आम आदमी पार्टी से।

केजरीवाल का दावा है कि उन्होंने किसी भी विधायक को एक पैसा नहीं दिया। उनका मकसद ऐसा करके सरकार के कामकाज को बेहतर ढंग से चलाना था। लेकिन राष्ट्रपति के बिल खारिज करने के बाद उनके सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।