पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने 'हिंदु मैरिज बिल' पर किया साइन, बना कानून

नई दिल्ली ( 19 मार्च ): पाकिस्तानी के राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने हिंदु मैरिज बिल पर साइन कर दिया है। राष्ट्रपति के साइन के बाद अब यह बिल कानून बन गया है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद पाकिस्तान के हिंदुओं को शादियों के नियमन के लिए एक विशेष पर्सनल लाॅ मिल गया। यह पहला व्यक्तिगत कानून होगा जो पाकिस्तान में रह रहे हिंदू समुदाय के विवाह को कानूनी मान्यता देगा।


पाक मीडिया के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सलाह पर पाकिस्तान के इस्लामी गणराज्य ने हिंदू विवाद विधेयक, 2017 को मंजूरी दे दी।


बयान में कहा गया है कि यह पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू परिवारों की ओर से की जाने वाली शादियों के लिए एक ठोस कानून है और

हिंदू परिवार रीति-रिवाजों, रस्मों और समारोहों के मुताबिक शादियां कर सकेंगे।


पाकिस्तान की संसद ने हिंदू अल्पसंख्यकों के विवाह के नियमन से संबंधित विधेयक को पहले ही मंजूरी दे दी थी। नैशनल असेंबली ने हिंदू विवाह अधिनियम-2017 को पारित किया था। इससे पाकिस्तान के हिंदुओं को विवाह से संबंधित अपना पहला व्यक्तिगत कानून अब मिल जाएगा। लंबी प्रक्रिया के बाद इस विधेयक को पारित किया गया था।


इस कानून के बन जाने से अब पाकिस्तान में रहने वाले हिदुओं को विवाह का रजिस्ट्रेशन कराने की सुविधा मिलेगी। कानून को पारित होने से पहले लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा है। नेशनल असेंबली में दूसरी बार यह विधेयक पारित हुआ है। इससे पहले पिछले साल सितंबर में संसद ने इस कानून को पारित कर दिया था। लेकिन बाद में सीनेट ने इसमें कुछ बदलाव कर दिए थे।


अब राष्ट्रपति के साइन के बाद अब ये कानून बन गया है और यह तीन प्रांतों पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में लागू होगा। सिंध प्रांत पहले ही अपने यहां हिंदू विवाह अधिनियम लागू कर चुका है। इस कानून को पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यक हिदुओं के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अधिनियम के अंतर्गत हिंदुओं को मुस्लिमों के 'निकाहनामे' की तरह शादी के प्रमाण के तौर पर 'शादीपरत' दिया जाएगा।


विधवाओं को सरकार से मिलने वाली सुविधाओं का लाभ लेने में शादी का पंजीकरण काम आएगा। शादी के लिए हिंदू जोड़े की न्यूनतम उम्र 18 साल रखी गई है। कानून के मुताबिक, अलग होने के लिए हिंदू दंपत्ति अदालत से तलाक का अनुरोध भी कर सकेंगे।

तलाक ले चुके व्यक्ति को इस कानून के तहत फिर से विवाह का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा हिंदू विधवा को पति की मृत्यु के छह महीने बाद फिर से शादी का अधिकार होगा। पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी वहां की जनसंख्या का करीब 1.6 फीसद है।