राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने पिता की तरह उंगली पकड़ कर चलना सिखायाः मोदी

नई दिल्ली (3 जुलाई): नरेंद्र मोदी और प्रणब मुखर्जी ने  राष्ट्रपति भवन में प्रेसिडेंट ए स्टेट्समैन बुक को लॉन्च किया। इस मौके पर मोदी ने कहा- “मुझे प्रणब दा की उंगली पकड़कर चलने जैसी कोशिश से काफी मदद मिली। पिछले तीन साल में राष्ट्रपति जी से एक भी मुलाकात ऐसी नहीं रही, जिसमें उन्होंने पिता की तरह मुझे न समझाया हो। मेरे चुनाव कैम्पेन के वक्त वो कहते थे कि भाई हार-जीत तो चलती रहती है। थोड़ा सा अपनी सेहत का भी ख्याल रखा करो।

 

मोदी ने कहा- मेरे देश के राष्ट्रपति (प्रणब मुखर्जी) एक बालक की तरह हंसते हैं…मोदी ने कहा- हमें सामान्य से दिखने वाले राष्ट्रपति देखे हैं, लेकिन जब फोटोज के रूप में एक किताब छपती है तो हमें पता चलता है कि मेरे देश के राष्ट्रपति (प्रणब मुखर्जी) एक बालक की तरह हंसते हैं। चाहे किसी देश का बड़े से बड़ा राष्ट्रप्रमुख ही क्यों ना आए। उस तस्वीर को देखकर पता चलता है कि हमारे राष्ट्रपति का आत्मविश्वास कितना मजबूत है।”

* “हमें गर्व होता है। राष्ट्रपति के अंदर भी एक इंसान होता है। ये चीजें कैमरा से पता चलती हैं। जब महात्मा गांधी थे, तब शायद इतने कैमरा नहीं थे लेकिन गांधी की दो तस्वीरे। एक में वे झाड़ू लेकर सफाई कर रहे हैं और दूसरी में माइक्रोस्कोप से तारे देख रहे हैं। इनसे गांधीजी के व्यक्तित्व को समझने में मदद मिलती है।”

* “जब एसएमएस शुरू हुए तो खबरें आई थीं कि टेक्नोलॉजी के साथ लेटर लिखना बंद हो जाएंगे। एक जमाना था जब ऑटोग्राफ और फोटोग्राफ का चलन था लेकिन अब दोनों का मिला-जुला स्वरूप सेल्फी आ गई है।”

* मोदी ने कहा- “अखबारों के जरिए लोगों ने अपने नेताओं को पहचाना है। ये ग्रंथ प्रणब दा के अंदर झांकने का मौका देता है। आपातकाल के वक्त अलग-अलग विचार के लोगों के बीच काम करने का मौका मिला। तब मैं छोटा था, मैं गुजरात में धीरूभाई देसाई के घर जाता था। उनसे मिलता था।”

*  “जब सीएम बना तो बड़े गर्व से कहना चाहता हूं कि कांग्रेस के दिग्गज नेता नवल किशोर शर्मा से बहुत कुछ सीखने का मौका मिला। मैं ये कह सकता हूं कि दिल्ली आया तो प्रणब दा कि उंगली पकड़कर आगे बढ़ने में मुझे काफी मदद मिली।”

* “मेरे लिए बहुत संबल रहा है। मैं एक ऐसा इंसान हूं कि मुझे काम जल्दी पूरा करने की इच्छा रहती है। एक बार मैंने किसी अखबार में (आप लोग इन्हें लीक को कर ही लेते हैं) पढ़ा कि मैं अफसरों की मीटिंग ले रहा था। जब मीटिंग खत्म हुई तो पूछा अरे ये कैसे हुआ इतने जल्दी मीटिंग खत्म हो गई।”