'स्विंग का सुल्तान' टीम इंडिया का ये गेंदबाज आज बंदूक लेकर करता है खेती

नई दिल्ली(11 अप्रैल): कभी अपने स्विंग से दिग्गज से दिग्गज बल्लेबाजों को चकाने वाले टीम इंडिया के तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार आईपीएल-9 में गुजरात लॉयंस की तरफ से खेलेंगे। गुजरात ने प्रवीण को 3.5 करोड़ में खरीदा है। साल 2008 में ऑस्ट्रेलिया में हुई कॉमनवेल्थ सीरिज में प्रवीण कुमार ने ब्रिस्बेन के मैदान में अपनी स्विंग गेंदबाजी का जबरदस्त नमूना पेश करते हुए 46 रन देकर चार विकेट झटके और भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को पहली बार उसके ही घर में हराकर त्रिकोणीय वनडे सीरिज अपने नाम की। इस मैच में प्रवीण कुमार मैन ऑफ द मैच चुने गए। प्रवीण अपने पूरे करियर में चोटों से खास परेशान रहे। 29 साल के प्रवीण टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं। 

पहलवानों के परिवार से आने वाले प्रवीण कुमार ने क्रिकेट को अपनी जिंदगी बनाया और चार साल तक वे टीम इंडिया की गेंदबाजी के सूत्रधार रहे। प्रवीण के पिता सकत सिंह पुलिस कांस्टेबल थे और वे चाहते थे कि परिवार में अन्य लोगों के तरह ही वह भी अखाड़ा जॉइन करे लेकिन प्रवीण ने मना कर दिया। उन्होंने परिवार के दबाव को झेलते हुए क्रिकेट को अपना साथी बना लिया। प्रवीण ने आरपी सिंह, पीयूष चावला और सुरेश रैना जैसे सितारों के साथ उत्तर प्रदेश अंडर-19 टीम का प्रतिनिधित्व किया। अंडर-19 टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के बूते उन्हें फर्स्ट क्लास क्रिकेट में जगह मिल गई। 

हरियाणा के खिलाफ अपने पहले ही मैच में प्रवीण ने नौ विकेट लिए। पहले ही सीजन में उन्होंने 41 विकेट लिए और 368 रन बनाए। पहले दो सीजन 90 विकेट लेने के बाद प्रवीण को केन्या दौरे के लिए 2007 में इंडिया ए में शामिल किया गया। इस दौरे पर प्रवीण ने बल्ले और गेंद दोनों से  शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद 2007 में ही पाकिस्तान के खिलाफ आखिरी दो वनडे के लिए प्रवीण को टीम इंडिया में लिया गया । अगले ही साल फरवरी में ऑस्ट्रेलिया में प्रवीण ने सीबी सीरिज में चार मैच खेले और 10 विकेट लिए। यह टूर्नामेंट भारत ने जीता। लगातार अच्छे प्रदर्शन के चलते उनकी टीम इंडिया में जगह लगभग पक्की हो गई और उन्हें 2011 वर्ल्ड कप के लिए टीम में चुन लिया गया लेकिन ऎन मौके पर उन्हें चोट लग गई और वे टीम से बाहर हो गए।

इसके बाद वे टीम में अंदर बाहर होते रहे और 2012 में उन्होंने आखिरी बार टीम इंडिया की ओर से वनडे खेला। इसी बीच इंग्लैण्ड दौरे पर टेस्ट सीरिज भी खेली जिसमें भारत 4-0 से हारा था। इस सीरिज में वे भारत की ओर से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज थे। प्रवीण बताते हैं कि वे अगर क्रिकेटर नहीं होते तो किसान होते। जब वे क्रिकेट नहीं खेल रहे होते हैं तो अपने 200 बीघा के फार्म हाउस पर समय बिताते हैं।

प्रवीण कुमार अब भी टीम इंडिया में वापसी का सपना देखते हैं। इस साल रणजी में वे उत्तर प्रदेश के कप्तान हैं। वे रणजी में यूपी की ओर से ओपनिंग बल्लेबाजी भी कर चुके हैं। टीम से बाहर होने में सबसे बड़ा कारण उनका गुस्सा भी रहा। एक बार अंपायरों से भिड़ने के चलते उन पर तीन मैच का प्रतिबंध झेलना पड़ा था।

उनके पास चार लाइसेंसशुदा बंदूके हैं और एक राइफल है। अपने फार्म हाउस पर वे जब खेतों में जाते हैं तो बंदूक साथ रखते हैं। उनका कहना है कि गन्ने के खेतों में लुटेरे घूमते रहते हैं। इसके साथ ही एनएच-58 पर उनके नाम पर एक रेस्टोरेंट भी है।