पुराने ब्राह्मण वोटबैंक को साधने में जुट गया है कांग्रेसी खेमा

अशोक तिवारी, नई दिल्ली (17 मई): कांग्रेस के तारणहार बने हैं मोदी को दिल्ली और नीतीश को बिहार का ताज दिलाने वाले प्रशांत किशोर। दावा है कि कांग्रेस अपने सबसे पुराने ब्राह्मण वोटबैंक को साधने की कोशिश में जुटी है। संभव है कि कांग्रेस प्रियंका को कैंपने की जिम्मेदारी सौंपे और यूपी में ब्राह्मण चेहरा प्रोजेक्ट करे।  

बीजेपी ने जब दलित वोटों पर अपनी नजरें गड़ाईं तो कांग्रेस का खेमा अपने पुराने ब्राह्मण वोटबैंक को साधने में जुट गया है। कांग्रेस सूत्रों की मानें तो इस बात को लगभग तय मान लिया जाए कि कांग्रेस यूपी में चेहरे के तौर पर किसी बड़े ब्राह्मण को प्रोजेक्ट करने की तैयारी में है।

इसके पीछे खास वजह है: ब्राह्मण वोटबैंक के साथ कांग्रेस का पुराना नाता। यूपी में अब तक कुल 6 ब्राह्मण मुख्यमंत्री बने हैं और ये सभी ब्राह्मण मुख्यमंत्री कांग्रेस के ही थे। यूपी में 23 साल तक कांग्रेस के खेमे से ब्राह्मण मुख्यमंत्रियों के हाथ में ही सत्ता रही है। ऐसे में संभव है कि कांग्रेस यूपी में शीला दीक्षित या जितिन प्रसाद को आगे कर सकती है।

जानकारी के मुताबिक दो दिन पहले कानपुर में हुई कांग्रेस की एक सीक्रेट मीटिंग में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने ये बात खुद कही है। प्रशांत किशोर शीला दीक्षित या जितिन प्रसाद पर दांव लगाना चाहते हैं।

यूपी में सवर्ण जातियां 18 फीसदी हैं, जिसमें ब्राह्मण 10 फीसदी हैं। 1990 के राम मंदिर आंदोलन से पहले ब्राह्मण कांग्रेस का वोट बैंक होता था। 1990 के आंदोलन के दौरान ब्राह्मण बीजेपी के खाते में खिसक गए। 2002 के बाद जब बीजेपी में ब्राह्मणों की अनदेखी होने लगी तो नतीजा ये हुआ कि 2007 और 2009 के चुनावों बीजेपी की सीटें बहुत कम हो गईं। 2007 के चुनाव में बीएसपी ने 86 ब्राह्मणों को टिकट दिया था। बीएसपी की सोशल इंजीनियरिंग काम कर गई थीं और मायावती बहुमत के साथ सरकार में आई थीं।

अब कांग्रेस को लग रहा है कि इस बार फिर मौका है जब बीजेपी दलितों को साधने में लगी है। तब ब्राह्मणों को दोबारा अपने साथ जोड़ लिया जाए। हालांकि कांग्रेस के खेमे में ये भी हलचल सामने आती रही है कि प्रियंका के कंधों पर कैंपेन की जिम्मेदारी और ब्राह्मण चेहरा प्रोजेक्ट करने की हवा, ये सारे दावे अभी हवा-हवाई हैं। प्रियंका के नाम पर भले जो सस्पेंस हो लेकिन इतना साफ है कि जो ब्राह्मण कभी यूपी में किंग हुआ करता था। अब वो किंगमेकर की भूमिका में है और उसी के सहारे कांग्रेस अपने कमजोर पड़ चुके हाथ में जान फूंकना चाहती है।