राष्ट्रपति ने कहा - किसी देश को आतंकवाद को संरक्षण और समर्थन देने की इजाजत नहीं दी जा सकती

नई दिल्ली ( 4 नवंबर ) : राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को कहा कि सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) जैसे मंच पर आपसी हितों को आतंकवाद की छाया में आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। पाकिस्तान का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति का हिस्सा बनाते हैं उनके मंसूबों को विश्व समुदाय को एकजुट होकर रोकना होगा। दुनिया में किसी देश को आतंकवाद को संरक्षण और समर्थन देने की इजाजत नहीं दी जा सकती और ऐसा करने वालों को अलग-थलग करने की जरूरत है।

मुखर्जी ने अपनी इस बात के जरिये उरी आतंकी हमले के बाद इस्लामाबाद में सार्क सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेने के भारत के रुख को सही ठहराया। सार्क अध्यक्ष के नाते नेपाल ने भी सीमा पार आतंकवाद का दंश झेल रहे भारत को भरोसा दिया कि आतंक के खिलाफ लड़ाई में वह पूरी तरह भारत के साथ है।

राष्ट्रपति ने यहां भारत और नेपाल के थिंक टैंक के सम्मेलन में कहा, हम सार्क और बिम्सटेक के जरिये क्षेत्रीय सहयोग के नए दौर और ढांचे को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। लेकिन सीमा पार आतंकवाद और सहयोग दोनों साथ-साथ नहीं चल सकते।

मुखर्जी ने साफ इशारा किया कि पाकिस्तान की वजह से सार्क के अन्य देशों के साथ सहयोग और विकास के संबंध बंधक नहीं रहेंगे। इस क्रम में नेपाल, बांग्लादेश और भूटान के साथ भारत के मोटर वाहन समझौते को अहम बताते हुए उन्होंने कहा कि व्यापार व सहयोग के लिहाज से यह मील का पत्थर साबित होगा।