भेदभाव और नफरत हमारे देश के लिए खतरा: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

नई दिल्ली (8 जून): नागपुर के आरएसएस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शरीक होने पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश की संस्कृति और उसकी पहचान की विशेषता का उल्लेख करते हुए कई बातें कही। उन्होंने कहा कि मैं यहां पर राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बोलने आया हूं। उन्होंने कहा कि देश के लिए समर्पण ही देशभक्ति है। मुखर्जी ने कहा कि भारत खुला हुआ देश रहा है। भारत के दरवाजे पहले से खुले हुए हैं।  

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि आज गुस्सा बढ़ रहा है। हर दिन हिंसा की ख़बर आ रही है। हिंसा, गुस्सा छोड़कर हम सब शांति के रास्ते पर चलें। उन्होंने कहा- विविधता और टॉलरेंस में ही भारत बसता है। सिर्फ एक धर्म एक भाषा भारत की पहचान नहीं। पचास सालों में यही मैने सीखा है। उन्होंने कहा कि भेदभाव और नफरत करेंगे तो हमारी पहचान को ख़तरा होगा। अलग  भाषा, धर्म और रंग भारत की पहचान है।पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि विविधता में एकता भारत को ख़ास बनाता है। मैं राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बोलने आया हूं। हमारी राष्ट्रीय पहचान विविधता में एकता से है। भारत का राष्ट्रवाद वसुधैव कुटम्बकम से प्रभावित है।इससे पहले बुधवार को जब प्रणब मुखर्जी नागपुर पहुंचे, तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह भैयाजी ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। उनके साथ नागपुर महानगर संघचालक राजेशजी लोया और विदर्भ प्रांत के सह कार्यवाह अतुल मोघे भी उपस्थित थे।

हाइलाइट्स: 

प्रणब मुखर्जी की बड़ी बातें...

- मैं अपने विचारों को साझा करने आया हूं

- भारत के दरवाजे सबके लिए खुले हुए

बाल गंगाधर तिलक ने 'स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है' का नारा दियाराष्ट्रवाद किसी भाषा, रंग, धर्म, जाति आदि से प्रभावित नहीं होताहमें लोकतंत्र गिफ्ट के रूप में नहीं मिला

संघ प्रमुख मोहन भागवत की बड़ी बातें...

- पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को अपना समय देने के लिए धन्यवाद

- हर साल होता है यह कार्यक्रम, लेकिन इस बार चर्चा कुछ ज्यादा

- प्रणव मुखर्जी को कैसे और क्यों बुलाया, यह चर्चा बेकार

- भारत में रहने वाला हर शख्स अपना, इसमें कोई विवाद नहीं- दूसरों की विविधता को स्वीकार करके उसे सम्मान देते हुए एकता जरूरी- हम सभी को एक होकर देश की सेवा करनी होगी- देश में कोई दुश्मन नहीं, सबकी माता भारत माता है- संघ का काम लोगों को जोड़ना

RSS लोकतांत्रिक विचारों वाला संगठन हैस्थापना के बाद विभिन्न दिक्कतों के बाद भी संघ आगे बढ़ता गया, अब संघ लोकप्रिय है। जहां जाते हैं, हमें स्नेह मिलता हैसंघ में किसी को अपेक्षा नहीं करना सिखाया जाता हैअनेक विचारों के महापुरूष हमारे कार्यक्रमों में आते रहते हैं

महाराष्ट्रः नागपुर में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी। 

आरएसएस संस्थापक के.बी.हेडगेवार के जन्मस्थान पहुंच पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी विजिटर बुक पर लिखा, 'आज मैं यहां भारत माता के एक महान सपूत के प्रति अपना सम्मान जाहिर करने और श्रद्धांजलि देने आया हूं' 

हेडगेवार की याद में बने स्मृति मंदिर में पहुंचे प्रणब मुखर्जी, मोहन भागवत ने किया स्वागत