गुजरात दंगों ने 2004 के चुनाव में पटरी से उतारी थी BJP की गाड़ी- प्रणव मुखर्जी

नई दिल्ली (15 अक्टूबर): पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की माने तो 2004 के लोकसभा चुनाव में गुजरात दंगों ने बीजेपी की गाड़ी पटरी से उतार दी थी। प्रणब मुखर्जी ने अपनी आत्मकथा 'द कोएलिशन ईयर्स : 1996-2012' के तीसरे संस्करण में उन्होंने लिखा है कि इस पूरी अवधि (वाजपेयी सरकार के दौरान) में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की मांग जोर पकड़ती रही। सांप्रदायिक तनाव का गुजरात में काफी बुरा असर पड़ा, जो 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों के रूप में देखने को मिला।

उन्होंने लिखा है कि गुजरात में 2002 में हुए दंगे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार पर 'संभवत: सबसे बड़ा धब्बा' था और इस वजह से ही 2004 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा था। उन्होंने ने अध्याय 'फर्स्ट फुल टर्म नॉन कांग्रेस गवर्नमेंट' में लिखा है कि साबरमती एक्सप्रेस के एक डिब्बे में लगी आग में 58 लोग जलकर मर गए। सभी पीड़ित अयोध्या से लौट रहे हिंदू कारसेवक थे। इससे गुजरात के कई शहरों में बड़े पैमाने पर दंगे भड़क उठे थे। संभवत: यह वाजपेयी सरकार पर लगा सबसे बड़ा धब्बा था, जिसके कारण शायद बीजेपी को आगामी चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा। मुखर्जी ने कहा कि वाजपेयी एक उत्कृष्ट सांसद थे। भाषा पर उम्दा पकड़ के साथ वह एक शानदार वक्ता भी थे, जिनमें तत्काल ही लोगों के साथ जुड़ जाने और उन्हें साथ ले आने की कला थी।

उन्होंने अपनी किताब में आगे लिखा है कि राजनीति में वाजपेयी को लोगों का भरोसा मिल रहा था और इस प्रक्रिया में वह देश में अपनी पार्टी, सहयोगियों और विरोधियों का भी सम्मान अर्जित कर रहे थे। वहीं, विदेश में उन्होंने भारत की सौहार्द्रपूर्ण छवि पेश की और अपनी विदेश नीति के जरिए देश को दुनिया से जोड़ा। प्रभावशाली और विनम्र राजनेता वाजपेयी ने हमेशा दूसरों को उनके कार्यों का श्रेय दिया।