मिशन चंद्रयान 2 : 14 दिनों तक चांद से जानकारियां देता रहेगा रोवर प्रज्ञान

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 जुलाई): श्रीहरिकोटा से आज चंद्रयान-2 का सफल लॉन्चिंग हुआ। अब यह यान अगले 23 दिनों तक धरती के इर्द गिर्द घूमता रहेगा। इस दौरान इसरो के वैज्ञानिक इसकी कक्षा को बढ़ाते जाएंगे। chandrayaan-2 को सबसे पहले एक अंडाकार कक्षा में स्थापित किया जाएगा, जिसकी धरती से सबसे नजदीकी दूरी 170 किलोमीटर होगी और सबसे दूर की दूरी 39120 किलोमीटर होगी।

लॉन्चिंग के बाद धरती की अंडाकार कक्षा में स्थापित होने के बाद चंद्रयान-2 को बार-बार छोटे-छोटे रॉकेट लॉन्च कर कक्षा को बढ़ाया जाएगा। यह प्रक्रिया 23 दिनों तक चलेगी। चंद्रयान-2 के कुल तीन मुख्य हिस्से हैं। पहला हिस्सा ऑर्बिटर है। चांद की सतह के नजदीक पहुंचने के बाद चंद्रयान चांद के साउथ पोल की सतह पर उतरेगा। इस प्रक्रिया में 4 दिन लगेंगे। चांद की सतह के नजदीक पहुंचने पर लैंडर (विक्रम) अपनी कक्षा बदलेगा। फिर वह सतह की उस जगह को स्कैन करेगा जहां उसे उतरना है। लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और आखिर में चांद की सतह पर उतर जाएगा।

दूसरा लैंडर। लैंडिंग के बाद लैंडर (विक्रम) का दरवाजा खुलेगा और वह रोवर (प्रज्ञान) को रिलीज करेगा। रोवर के निकलने में करीब 4 घंटे का समय लगेगा। फिर यह वैज्ञानिक परीक्षणों के लिए चांद की सतह पर निकल जाएगा। इसके 15 मिनट के अंदर ही इसरो को लैंडिंग की तस्वीरें मिलनी शुरू हो जाएंगी। तीसरा हिस्सा है रोवर, जिसे प्रज्ञान नाम दिया गया है। 27 किलोग्राम का यह रोवर 6 पहिए वाला एक रोबॉट वाहन है। इसका नाम संस्कृत से लिया गया है, जिसका मतलब 'ज्ञान' होता है।

विक्रम लैंडर के चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद इसमें से प्रज्ञान रोवर को बाहर निकाला जाएगा। प्रज्ञान रोवर लैंडिंग की जगह से 500 मीटर के दायरे में घूमेगा। प्रज्ञान रोवर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अगले 12 दिनों तक यानी 20 सितंबर तक तमाम वैज्ञानिक प्रयोग करेगा। इन वैज्ञानिक प्रयोगों में सबसे खास है चंद्रमा की सतह पर मौजूद मिट्टी को लेजर बीम के जरिए जलाना और उससे मिले स्पेक्ट्रम के जरिए यह पता लगाना कि चंद्रमा पर कौन-कौन से तत्व मौजूद हैं, साथ ही कितनी-कितनी मात्रा में मौजूद है।