मोदी सरकार की इस योजना से खुश है जनता, सीधे खाते में आ रहे हैं रुपये

न्यूज 24 ब्यूरो,केजे श्रीवत्सन, राजस्थान(22 जनवरी):  पीएम नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2014 को 'प्रधानमंत्री जन धन योजना' की घोषणा की थी और इसका शुभारंभ 28 अगस्त 2014 को हुआ था। प्रधानमंत्री जन धन योजना के लिहाज़ से राजस्थान देश के उन तीन राज्यों में से एक है जहाँ सबसे ज्यादा खाते खुले थे। तब राजस्थान में भी बीजेपी की ही सरकार थी ऐसे में इस योजना के लिए बैंकों के जरिये ग्रामीण इलाकों तक में ख़ास शिविर लगाये गए और लोगों के खाते खोले गए।

आंकड़ों के मुताबिक योजना के शुरू होने से लेकर दिसंबर साल 2018 तक राजस्थान में जनधन योजना के तहत अलग अलग बेंकों ने कुल 24,451,952 नए  खाते खोले। हालाँकि जीरो बेलेंस का यह खाता प्रचारित किया गया लेकिन शुरू में सबसे कम से कम 500 रूपये इस खाते में जमा कराने में जबरदस्त रूचि दिखाई गई। जिसके चलते देखते ही देखते इस खातों के जरिये बेंकों में कुल जमा रकम 5543.34 करोड़ रुपये तक पहुँच गयी। हालाँकि इस दौरान जीरो बेलेंस वाले कई खाते निष्क्रिय भी रहे और ऐसे निष्क्रिय और गैर ट्रांजेक्शन वाले करीब 3 लाख 11हज़ार जनधन खातों को राजस्थान में पिछले 2 सालों में बंद भी किया गया है। पहले बेंकों में जाने से कतराने वाले लोगों को मिलने वाली कई योजनाओं की राशि भी इन्ही खातों में सीधे जमा होने से कई लोगों को तसल्ली हुई की खाताधारकों को एटीएम से पैसे लेने के लिए रुपए डेबिट कार्ड दिया गया। जमा राशि पर ब्याज भी मिलने लगी।

इसी पर न्यूज़ 24 ने राजस्थान के बगरू इलाके के गाडोता गाँव में जाकर जनधन योजना की ग्राउंड रियलिटी की जाँच शुरू की। जहाँ मनरेगा के तहत काम कर रही महिलाओं से मुलाकात हुइ तो इन सभी के पास पासबुक थे, और इन्ही पासबुक के जरिये ये ठेकेदार के पास अपने काम की एंट्री भी करवा रही थी ताकि बेंकों के इसी खाते में उन्हें काम के बदले रूपये भी मिल सके। महिलाएं इस बात की ख़ुश हैं की उनके एकाउंट में अब वक़्त पर सीधे रूपये आ रहे हैं।

एक और शक्श से बात करने पर उसने बताया कि, उसे भी इस बात की ख़ुशी है की जन धन योजना के तहत उसके खाते में लगातार काम के बदले रूपये तो आ ही रहे हैं साथ ही 12 रूपये जमा करवाकर 2 लाख रूपये तक का बीमा भी इसी जनधन बेंक खाते में जरिये हुआ है। साथ ही अपने गाँव के पंचायत में ही लगे कैम्प में उसने अपने परिवार के सभी सदस्य खासकर बेटे का भी एकाउंट खुलवाया जिसमे छात्रवृत्ति के 30 हज़ार रूपये भी आ गए।

वहीँ गाँव की पंचायत से जुड़े लोगों की माने तो जन धन योजना का फायदा तो है लेकिन इसका गाँवों में एक बड़ा नुक्सान यह भी सामने आ रहा है की कई लोगों को यह भी पता नहीं चल पा रहा है की उनके खाते में कितने रूपये आये जबकि कुछ लोगों के काम के एवज में आज तक रूपये नहीं मिला। राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में बेशक कुछ लोगों को परेशानी जरुर है मगर उन्हें तमाम खामियों के बाद भी लोगों में इस बात की ख़ुशी है की उनकी मेहनत की कमाई अब सीधे उनके खाते में आ रही हैं।