एक आलू से 40 दिन जलेगी घर की बिजली !

नई दिल्ली (23 मई): एक आलू चालीस दिनों तक एलईडी बल्ब को जला सकता है।ये सिद्धांत हाईस्कूल की किताबों में पढ़ाया जाता है। इसके लिए ज़रूरत होती है दो धातुओं की- पहला एनोड, जो निगेटिव इलेक्ट्रोड है, जैसे कि ज़िंक, और दूसरा कैथोड - जो पॉज़ीटिव इलेक्ट्रोड है, जैसे कॉपर यानी तांबा। आलू के भीतर मौजूद एसिड ज़िंक और तांबे के साथ रासायनिक क्रिया करता है और जब इलेक्ट्रॉन एक पदार्थ से दूसरे पदार्थ की तरफ जाते हैं तो ऊर्जा पैदा होती है। आप इसी प्रभाव को पाने के लिए इन दो इलेक्ट्रोड्स के बीच कई पदार्थ रख सकते हैं।

आलू को आठ मिनट उबालने से आलू के अंदर कार्बनिक ऊतक टूटने लगते, प्रतिरोध कम होता है और इलेक्ट्रॉन्स ज़्यादा मूवमेंट करने लगते हैं इससे अधिक ऊर्जा बनती है। आलू को चार-पाँच टुकड़ों में काटकर इन्हें तांबे और ज़िंक की प्लेट के बीच रखे जाने से ऊर्जा 10 गुना बढ़ गई यानी बिजली बनाने की लागत में कमी आई।

वैज्ञानिक राबिनोविच कहते हैं, इस बिजली की वोल्टेज़ कम है, लेकिन ऐसी बैटरी बनाई जा सकती है जो मोबाइल या लैपटॉप को चार्ज कर सके। एक आलू उबालने से पैदा हुई बिजली की लागत 9 डॉलर प्रति किलोवाट घंटा आती है, जो ड्राई-सेल बैटरी से लगभग 50 गुना सस्ती थी।