INSIDE STORY: जानिए कैसे हिन्दुओं के लिए नर्क बना पाकिस्तान

डॉ. संदीप कोहली, नई दिल्ली (12 अगस्त): पाकिस्तान में हिंदू तीर्थस्थलों और मंदिरों के रख-रखाव पर सवाल उठते रहें हैं। कहीं हिंदुओं को मंदिरों में जाने की इजाजत नहीं तो कहीं मंदिरों की हालत इतनी खराब कि दीवारों पर दरारें और इमारतें जर्जर हो चुकी हैं। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में 11 अगस्त को तहरीक-ए-इंसाफ के सदस्य लालचंद मल्ही ने ‘नेशनल मायनोरिटी डे’ पर यह मुद्दा उठाया। आईए जनाते हैं, कैसे हिन्दुओं के लिए नर्क बन चुका है पाकिस्तान...

इस्लामाबाद के इस मंदिर में हिंदूओं को नहीं है जाने की इजाजत

- पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हिन्दुओं के लिए नर्क बन चुका है - इस्लामाबाद में ऐसी कोई जगह नहीं, जहां हिंदू अपने धार्मिक कार्यक्रम कर सकें। - इस्लामाबाद में एक प्राचीन मंदिर है, लेकिन वहां हिंदुओं को पूजा की इजाजत नहीं।  - इस्लामाबाद सैदपुर के है भगवान राम का मंदिर  - मंदिर का निर्माण 1580 के आसपास राजा मानसिंह ने कराया था। - मंदिर के साथ यात्रियों के ठहरने के लिए धर्मशाला भी बनाई गई - मगर इस धर्मशाला का इस्तेमाल पब्लिक टायलेट के लिए किया जा रहा है। - पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के मेंबर लाल चंद मल्ही ने 11 अगस्त को उठाया मुद्दा। - नेशनल मायनोरिटी डे पर मंदिर को हिंदू परिवारों के हवाले किए जाने की मांग की। - लगभग साढ़े आठ सौ हिंदूओ को राम मंदिर मे जाने का अधिकार मिलना चाहिए। - भारत-पाकिस्तान के बंटवारे से पहले सैदपुर में बड़ी संख्या में हिंदू परिवार रहते थे। - 1947 में उनमें से अधिकांश भारत चले गए और इसी के साथ मंदिर की मर्यादा खत्म होने लगी।

हिंदुओं के पवित्र तीर्थ कटास राज मंदिर की हालत जर्जर 

- पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चकवाल स्थित विश्व विख्यात हिंदू तीर्थ कटास राज मंदिर का हालत बेहद खराब है। - नवाज सरकार के सरंक्षण और विकास की बातें झूठी साबित हो गई हैं। - मंदिरों के गुंबदों, छतों, दीवारों और सीढ़ियों की मरम्मत ठीक ढंग से नहीं की गई - जिससे मंदिर की इमारतें जगह-जगह से जर्जर हो गई, दिवारों पर दरारें दिखाई देने लगी हैं। - सारे कॉम्पलेक्स में सीवरेज मैनहोल के ढक्कन या तो टूटे हुए हैं या फिर गायब हो चुके हैं।  - जरा सी बरसात होने पर दरारों में पानी का रिसाव होने लगता है। - कटास राज के महत्व को देखते हुए सूबा सरकार ने इसके विकास की योजना बनाई थी।  - साल 2006-07 से 2015-16 के बीच विकास कार्यों पर 11 करोड़ से ज्यादा की रकम खर्च की गई। - मगर सच्चाई यह है कि विकास कार्य तो दूर की बात सारा पैसा सूबे की सरकार ने खा लिया।

कैसे हिन्दुओं के लिए नर्क बना पाकिस्तान 

अगस्त 6, 2016- पाकिस्तान के अस्पताल में हिंदू डॉक्टर प्रीतम लखवानी की हत्या जुलाई 30, 2016- पाकिस्तान के अस्पताल में मृत पाया गया हिंदू डॉक्टर जुलाई 28 , 2016- सिंध प्रांत में कुरान के कथित अपमान और दो हिंदू युवको की हत्या। मई 8, 2016- पाकिस्तान में सिंध में हिंदू लड़के की यौन उत्पीड़न के बाद हत्या। अप्रैल 1, 2015- पाकिस्तान में 12 साल की हिन्दू लडकी के साथ गैंगरेप के बाद पेट्रोल डालकर हत्या। नवंबर 22, 2014- पाकिस्तान के दक्षिणी सिंध प्रांत में हिदू मंदिर में तोड़फोड़ और आगजनी की। अगस्त 28, 2014- पाकिस्तान के रावलपिंडी में मंदिर और हिंदुओं के घर गिराए गए अप्रैल 25, 2016- पाकिस्तान के अशांत उत्तर पश्चिम क्षेत्र में ने सिख नेता की हत्या। मार्च 16, 2014- पाकिस्तान में कराची में मंदिर में आग लगा दी, हिंदुओं में गुस्सा जनवरी 19, 2014- पाकिस्तान में लाहौर में हिंदू बच्ची की बलात्कार के बाद हत्या। नवंबर 8, 2011- पाकिस्तान के दक्षिणी सिंध प्रांत में चार हिंदू डॉक्टरों की हत्या।

क्या कहती हैं अलग-अलग रिपोर्ट

2015- यूरोपियन पार्लियामेंट इंटर ग्रुप आन फ्रीडम आफ रिलीजन की सालाना रिपोर्ट में कहा गया 5,000 हिंदूओं को पाकिस्तान छोड़ने पर किया गया मजबूर। 2014- मूवमेंट फॉर पीस एंड सॉलिडेरिटी इन पाकिस्तान (एमएसपी) के अनुसार 700 ईसाई और 300 हिंदू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया। 2012- पाकिस्तान के नेशनल कमिशन फॉर जस्टिस एंड पीस की वर्ष 2012 की रिपोर्ट के मुताबिक 74 प्रतिशत हिन्दू महिलाएं यौन शोषण का शिकार होती हैं। 2012- पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में हर महीने 20 से 25 हिन्दू लड़कियों का अपहरण होता है। 2011- पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक 12 से 14 साल की नाबालिग हिन्दू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया गया। 2011- हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की मानवाधिकार रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में 1947 में कुल आबादी का 25 प्रतिशत हिंदू थे, जो अब 1.6 प्रतिशत रह गए।

पाकिस्तान में हिंदुओं के लिए कोई विवाह कानून नहीं, महिलाओं के लिए हुई मुसीबत- पाकिस्तान में रह रहे लाखों हिंदुओं के लिए कोई विवाह कानून नहीं है। इस वैधानिक शून्य ने पाकिस्तानी हिंदुओं, खासकर महिलाओं के लिए कई तरह के मुद्दों को जन्म दे दिया है। रिश्तों का आधिकारिक प्रमाण नहीं होने की वजह से बैंक खाता खोलने से लेकर वीजा के लिए आवेदन करना तक लगभग असंभव होकर रह जाता है।

पाकिस्तान में हिंदू

- पाकिस्तान में बसे हिन्दुओं में से लगभग 96 फीसदी सिंध और पंजाब प्रान्त में ही रहते हैं। - ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क की एक रिपोर्ट के मुताबिक 1965 से लेकर अब तक तकरीबन सवा लाख पाकिस्तानी हिन्दुओं ने भारत की तरफ पलायन किया है। - पाकिस्तान मानव अधिकार आयोग के मुताबिक हर साल 1000 हिंदू पाकिस्तान से भाग कर भारत जा रहे हैं। - मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, पिछले पचास वर्षों में पाकिस्तान में बसे नब्बे प्रतिशत हिंदू देश छोड़ चुके हैं और अब उनके पूजा स्थल और प्राचीन मंदिर भी तेज़ी से ग़ायब हो रहे हैं। - पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार हो रहा है, 24 मार्च, 2005 को पाकिस्तान में नए पासपोर्ट में धर्म की पहचान को अनिवार्य कर दिया गया। - पाकिस्तान के स्कूलों में जबरन इस्लाम की शिक्षा दी जाती है। गैर-मुस्लिमों, खासकर हिंदुओं के साथ असहिष्णु व्यवहार किया जाता है। - हिंदू युवतियों और महिलाओं के साथ दुष्कर्म, अपहरण की घटनाएं आम हैं। उन्हें इस्लामिक मदरसों में रखकर जबरन मतांतरण का दबाव डाला जाता है। - 1965 की लड़ाई के दौरान कम से कम 10 हजार के लगभग हिंदूओं की आबादी अपनी संपत्ति छोड़कर भारत चली गई थी। - 1971 के युद्ध के दौरान और बाद लगभग नब्बे हजार हिंदू राजस्थान के शिविरों में चले गए, ये लोग थरपारकर इलाके थे जिस पर भारतीय फौज का कब्जा हो गया था। - 1978 तक उन्हें शिविरों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी. बाद में भुट्टो सरकार ने इलाका वापस ले लिया लेकिन सरकार ने लोगों को वापस लेने में कोई रुचि नहीं दिखाई। - 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद पाकिस्तान में जो प्रतिक्रिया हुई उसके परिणाम में अगले पांच साल के दौरान लगभग सत्रह हजार पाकिस्तानी हिंदू भारत चले गए। - 1965 और 1971 में आने वाले हिंदूओं को 2004 में भारतीय नागरिकता मिल गई लेकिन बाबरी मस्जिद की प्रतिक्रिया के बाद आने वाले हिंदूओं को अब तक नागरिकता नहीं मिल सकी है। - 1956 में पाकिस्तान का संविधान बना और पाकिस्तान प्रगतिशील और उदारवादी विचारधाराओं को त्यागकर इस्लामिक देश बन गया, और तभी से हिन्दुओं का वहां रहना दुश्वार हो गया।

हिंदूओं के धार्मिक स्थलों को किया जा रहा है खत्म

- पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के मुताबिक, सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों के ऐसे 1,400 से अधिक पवित्र स्थान हैं जिन तक उनकी पहुंच नहीं है। - हिंदुओं के धार्मिक स्थलों को समाप्त कर वहां दुकानें, खाद्य गोदाम, पशु बाड़ों में बदला जा रहा है। - माइनॉरिटी राइट ग्रुप इंटरनेशनल के मुताबिक 2-8 दिसंबर, 1992 के दौरान पाकिस्तान में तकरीबन 120 हिन्दू मंदिरों को गिराया गया। - जिया-उल-हक की तानाशाही से लेकर अब तालिबान के अत्याचारों तक पाकिस्तानी हिन्दुओं का जीवन दूभर ही रहा है। - आजादी के वक्त पाकिस्तान में कुल 428 मंदिर थे, जिनमें से अब सिर्फ 26 ही बचे हैं। - पाकिस्तान में ज़्यादातर हिन्दू मंदिर या गिरा दिए गए, या उन्हें होटल बना दिया गया है।

भारत में शरण लेने को मजबूर

- केंद्र सरकार ने पिछले साढ़े 5 साल के दौरान उन 1810 पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों की अर्जी मंजूर कर उन्हें भारतीय नागरिकता दी है। - सरकार ने वर्ष 2011 में 301, 2012 में 356, 2013 में 301, 2014 में 266 और 2015 में 263 पाकिस्तानी हिंदुओं को नागरिकता दी। - मौजूदा कैलेंडर वर्ष में 15 जून तक 323 पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों के आवेदन स्वीकृत कर उन्हें भारतीय नागरिकता प्रदान की गयी है। - फिलहाल सरकार 2,062 पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों की भारतीय नागरिकता की अर्जी पर विचार कर रही है।