प्राइवेट सेक्टर में OBC आरक्षण के मामले में राजनीति तेज

नई दिल्ली (11 फरवरी): देश के प्राइवेट सेक्टर में ओबीसी समुदाय के लिए 27 फीसदी आरक्षण के प्रस्ताव को लेकर राजनीति तेज़ हो गयी है। गौरतलब है, यह प्रस्ताव पिछड़ा वर्ग आयोग की तरफ से किया गया है जिसपर अब सामाजिक न्याय से जुड़ी पार्टियां केंद्र सरकार से बिल लाने की मांग कर रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने कहा है कि मोदी सरकार कानून बनाकर ये सुनिश्चित करे कि निजी क्षेत्र में भी कोटा लागू हो। शरद यादव ने कहा, "सरकार को पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश पर पार्टियों से बातचीत शुरू करना चाहिये। सरकार को बजट सत्र में ही बिल लाना चाहिये जिसमें प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण का प्रावधान हो।''

दूसरी तरफ सरकार का पक्ष है कि यह प्रस्ताव पुराना है। इस संबंध में आगे बढ़ने से पहले आम राय बनानी ज़रूरी है। सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा, "हमने अधिकारियों की एक कमेटी बनाई है जो सभी संबंधित वर्गों से बातचीत कर रही है। अभी माहौल अनुकूल नहीं है। जब माहौल अनुकूल बनेगा तब हम इस प्रस्ताव पर आगे पहल करेंगे।''

सरकार के लिए फिलहाल इस दिशा में आगे की राह आसान नहीं दिखती। इंडस्ट्री पहले ही प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण के प्रस्ताव को खारिज कर चुकी है। एसोचैम के सेक्रेटरी जनरल डी.एस. रावत ने कहा है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थिति में कंपनियों के लिए मैनपावर को रिटेन करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में ओबीसी समुदाय के लिए आरक्षण के प्रस्ताव पर सोचना भी संभव नहीं होगा।