कुछ इस तरह शुरू हो गई यूपी में सियासी बगावत

मानस श्रीवास्तव, लखनऊ, (22 जून): यूपी के महाभारत का ट्रेलर अभी से दिखना शुरू हो गया है। आज बीएसपी में बड़ी बगावत हुई। बीएसपी के सीनियर नेता स्वामी प्रसाद मौर्य आज हाथी से उतर गए और पार्टी सुप्रीमो मायावती को दलित की नहीं, दौलत की बेटी बता दिया, लेकिन, कुछ मिनट बाद भी मायावती ने मीडिया से कहा- वो तो खुद ही मौर्या को निकालने वाली थी। आखिर, यूपी में ये हो क्या रहा है? 

जो जुबान कल तक बहन जी बहन जी कहते नहीं थकती थी। वो अब मायावती की दलित राजनीति पर सवाल दाग रही है। विधानसभा चुनाव से पहले बीएसपी के मिशन 2017 को ये बड़ा झटका है। पार्टी के कद्दावर नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने मायावती पर सीधे टिकट बेचने का आरोप जड़ दिया। 

मायावती ने राजनीति के हर रंग देखे हैं। उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का तीर छोड़ दिया। स्वामी प्रसाद मौर्य अच्छी तरह जानते हैं कि राजनीति में कुछ भी हो सकता है। वोट बैंक की नब्ज भी वो एक जमाने से ही टटोलते रहे हैं। ऐसे में उन्होंने अभी रणनीति का खुलासा किए वगैर संकेत दे दिया कि बीएसपी के 60 विधायक उनके साथ हैं।

मौर्य के हाथी से उतरने का भले ही मायावती ने नफा-नुकसान का हिसाब लगा लिया हो। लेकिन, वोटरों को यही संदेश दे रही हैं कि पार्टी का भला हो गया। जैसे ही बीएसपी का किला दरका तुरंत आजम खान और शिवपाल यादव बधाई देने पहुंच गए । लेकिन, समाजवादी सूरमाओं ने स्वामी पर डोरे डालना शुरू कर दिया है।

स्वामी प्रसाद मौर्य चार बार विधायक रहे हैं। बीएसपी से उनका पुराना रिश्ता रहा है। लेकिन, अब वो हाथी से उतर चुके हैं। ऐसे में उनके समाजवादी पार्टी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं । सूत्रों के मुताबिक, स्वामी प्रसाद मौर्य कर साइकिल पर सवार हो जाते हैं। तो अगले मंत्रीमंडल विस्तार में उन्हें जगह भी मिल सकती है। पिछले दो साल में मायावती के करीब एक दर्जन करीबी उनसे दूर जा चुके हैं । ऐसे में मायावती को सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने घर को बचाए रखने की है।