6 साल बाद भारत में मिला पोलियो वायरस

हैदराबाद (15 जून): हैदराबाद में पोलियो वायरस मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। इस वायरस का पता सीवेज वाटर के लैब टेस्ट के दौरान लगा था। वायरस का नाम वीडीपीवी टाइप-2 है।

दरअसल, देश में 2010 के बाद पोलियो का कोई वायरस नहीं पाया गया था। 2013 में ही डब्ल्यूएचओ ने भारत को पूरी तरह से पोलियो फ्री घोषित किया था। लेकिन अब टेस्ट में इस वायरस का पता लगने के बाद राज्य सरकार काफी सतर्क हो गई है।

साइंटिस्ट्स को सता रहा ये डर तेलंगाना के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (हेल्थ) राजेश्वर तिवारी ने कहा कि हम हैदराबाद और रंगा रेड्डी जिलों में 20 से 26 जून के बीच स्पेशल कैम्पेन चलाने जा रहे हैं। इस दौरान 6 हफ्ते से 3 साल की उम्र तक के बच्चों की जांच की जाएगी। वहीं, साइंटिस्ट्स को डर है कि ये वायरस देश के दूसरे राज्यों में बच्चों को पोलियो का मरीज बना सकता है। हालांकि, सचिव सीके मिश्रा का कहना है कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसा पहली बार नहीं है कि पोलियो का वायरस मिला है। गुजरात और बिहार के अलावा पिछले साल अक्‍टूबर में दिल्ली में भी यह वायरस मिला था। स्वास्थ्य मंत्री ने पूरी स्थिति की समीक्षा के लिए मंगलवार को आपात बैठक बुलाई थी।

क्या है पोलियो वायरस? पोलियो एक संक्रामक रोग है जो पोलियो विषाणु से मुख्‍यत: छोटे बच्‍चों में होता है। यह बीमारी बच्‍चें के किसी भी अंग को जिन्‍दगी भर के लिए कमजोर कर देती है। पोलियो लाईलाज है, क्‍योंकि इसका लकवापन ठीक नहीं हो सकता है। बचाव ही इस बीमारी का एक मात्र उपाय है। बच्‍चों में पोलियों विषाणु के विरूद्व किसी प्रकार की प्रतिरोधक क्षमता नहीं होती है, इसी कारण यह बच्‍चों में होता है।