हरियाणा में जाट आंदोलन के दौरान पुलिस की निष्क्रियता

मोहित मल्‍होत्रा (18 अप्रैल): हरियाणा में जाट आंदोलन के दौरान पुलिस पूरी तरह विफल रही और मूकदर्शक बनी रही, ये बात अब पूरी तरह से साफ हो गई है। जाट आंदोलन के नाम पर हुए उपद्रव के दौरान हुए दंगों में पुलिस के फेलयर का पता लगाने के लिये हरियाणा सरकार ने यूपी के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी जिसने दंगों के दौरान हरियाणा पुलिस की भूमिका की जांच की।

सूत्रों के मुताबिक शुरुआती जांच रिपोर्ट में ये पता लगा है कि दंगों, उपद्रव और आगजनी के दौरान हरियाणा पुलिस के कांस्टेबल स्तर से लेकर कई और दूसरे पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे। अपनी ही जाति के प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ इनकी सहानुभूति रही और उस दौरान कई जाट पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी से गैर-हाजिर रहे व अपने सीनियर अफसरों के आदेश को भी अनसुना कर दिया। जाट आंदोलन के दौरान चल रहे उपद्रव में रोहतक, झज्जर और सोनीपत जैसे इलाके जहां सबसे ज्यादा हिंसा हुई और जहां सबसे ज्यादा जाट पुलिसकर्मियों महकमे में है, वहां पर इन जाट पुलिसकर्मियों ने अपनी जाति के आंदोनकारियों के खिलाफ कोई सख्त कार्यवाही नहीं की।

फिलहाल ये जांच रिपोर्ट हरियाणा सरकार को अधिकारिक तौर पर सौंपी नहीं गई है और सरकार का कहना है कि जांच रिपोर्ट उन्हें मिलने के बाद ही ऐसे पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्यवाही की जाएगी। लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस रिपोर्ट के आने के बाद हरियाणा सरकार और हरियाणा पुलिस के लिये सिरदर्द और भी बढ़ सकता है, क्‍योंकि ये रिपोर्ट सीधे तौर पर बयां कर रही है कि कैसे हरियाणा पुलिस में मौजूद जाट पुलिसकर्मी अपने ही जाति के उग्र आंदोलन के दौरान मूकदर्शक बने रहे। इसी हमदर्दी के तहत उन्होंने उपद्रव और आगजनी को रोकने की कोशिश नहीं की। फिलहाल ये जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद हरियाणा पुलिस के आला अधिकारियों ने इस मामले में पूरी तरह चुप्पी साथ ली है।