गैंगस्टर आनंदपाल के 'बुलेटफ्रूफ किले' पर छापा, मिला खुफिया रास्ता और टार्चर सेल

नई दिल्ली (9 अगस्त): कई वारदातों को शातिर तरीके से अंजाम देने वाले गैंगस्टर आनंदपाल पर कसने लगा है पुलिस का शिकंजा। राजस्थान पुलिस ने आनंदपाल लाडनूं स्थित आनंदपाल के फार्म हाउस पर छापा मारा है। आनंदपाल के गुर्गे सांवराद निवासी धर्मेन्द्र की पत्नी सीतादेवी के नाम से एनएन 65 पर यह फार्म हाउस नौ बीघा 14 बिस्वा भूमि पर बना हुआ है। हाल ही सीतादेवी ने इसे तहसीलदार के समक्ष सरेंण्डर कर दिया था। 

आनंदपाल का फार्म हाउस कोई पुराने जमाने का अभेद किला से कम नहीं है। सोमवार को इस फार्म हाउस को सरकारी घोषित करने गई पुलिस की टीम तो यहां पर सुरक्षा के बंदोबस्त देख ही चौंक गई। करीब 9 बीघा 14 बिस्वा में फैले 2 मंजिला फार्म हाउस में आनंदपाल अपने गुर्गों के साथ वारदात की योजना बनाता था। किले में खुफिया सुंरगे और टार्चर सेल भी बनाए गए थे। 

साथ ही गेट में आने वाले हर व्यक्ति पर निगरानी के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर रखे थे। पुलिस की टीम ये देख हैरान थी कि इस घर को कैदियों को बंद करने और गोलीबारी करने के लिए तैयार किया गया था। अगर कोई संदिग्ध दिख जाता तो उस पर फायरिंग की जाती। फायरिंग करने के लिए किले में खास बंकर बना रखे थे। 

यह भी पता चला कि करीब 9 बीघा 14 बिस्वा में फैले फार्महाउस में ही आनंदपाल ने कई अपराधों को अंजाम दिया। अपहरण हो या मडर्र सभी की योजना इसी फार्म हाउस में बनाई गई थी। ये फार्म हाउस आनंदपाल के खास रहे धर्मेंद्र हरिजन की पत्नी सीता देवी के नाम है। इसके अलावा यहां रहने के लिए आलिशान गद्दे, बेड, शाही कुर्सियां, चारपाई, कूलर, अलमारी, टीवी केबल सहित सारे सुख सुविधाओं का सामान भी मौजूद है।

बुलेटफ्रूफ किला बनाया... - फार्म हाउस में बना है आनंदपाल का दो मंजिला मकान - मकान में कई खुफिया सुंरगे और टार्चर सेल हैं  - बिल्डिंग में पहली व दूसरी मंजिल पर फायरिंग की अलग-अलग पोजिशन लेने के मोर्चे भी हैं। - छत से लेकर तहखाने में संदेश, मोबाइल व अन्य वस्तुएं पहुंचाने के लिए दीवारों में पाइप लगाकर स्थान बनाए हुए हैँ। - इस घर को पुलिस पर फायर करने, मुख्य द्वार पर आने वाले पर सीधा हमला करने एवं अन्य मोर्चे लेने के लिए बनाया गया है। - भवन में बनी खिड़कियों में इतना मजबूत अभेद लोहा काम में लिया गया था - फायर करने के बावजूद गोली अन्दर आर-पार नहीं हो सकती - लेकिन अन्दर बैठा हुआ व्यक्ति दूर से स्वयं के बिना किसी नुकसान पहुंचे गेट या अन्य किसी तरह अन्दर प्रवेश करने वाले व्यक्ति को ढेर सकता है।

कैदियों के लिए टार्चर सेल भी... - साथ ही कैद करने के लिए बनवा रखा था लोहे का पिंजरा  - आनंदपाल सिंह व उनके गुर्गे अपहरण करके लाए गए व्यक्ति को बंद कर देते थे - फिरौती का भुगतान नहीं होने तक उसे पिंजरे में रखते थे - साथ ही इसे यातनाएं देने के लिए काम में लेते थे।

तहखाना मिला...  - जांच के दौरान पुलिस को तहखाने के अन्दर भी एक अलग तहखाना मिला - जिसमें छिपने के लिए दो बड़ी कोटडिय़ा बनी हुई थी। - तहखाने में 10 से अधिक चारपाइयों रखी हुई मिली - जो गुर्गों के वहां रुकने व छुपने के काम में ली जाती थी - गद्दों के अलावा मनोरजंन के साजो सामान मौजूद थे। - तहखानों में भागने के लिए बड़ी खिडकियां बनाई हुई हैं।

आनंदपाल की पहली गाड़ी - फार्म हाउस में बने गैरेज में छिपाकर रखी गई एक पुरानी स्पेशियो गाड़ी मिली। - इस गाड़ी पर आगे व पीछे कहीं पर भी नंबर नहीं लगे हुए थे।  - इस गाड़ी के बारे में बताया जा रहा है कि यह आनंदपाल की सबसे पहली गाड़ी है। - जिसे कई वारदातों में इस्तेमाल किया गया है।