नए रोल में पुलिस, डंडे की बजाय हाथों में होगी ढोलक

अजमेर (14 जुलाई): कड़क वर्दी, डंडा और हथियार छोड़ अब पुलिस 'कम्युनिटी पुलिसिंग में गांव-ढाणियों में नुक्कड़ नाटक से महिला उत्पीडऩ, नशा मुक्ति व साम्प्रदायिक सौहार्द का पाठ पढ़ाएगी। पुलिस ने 'आवाज अभियान का आगाज किया है। अभियान के पहले चरण में महिलाओं पर होने वाले अत्याचार व उनकी रोकथाम के लिए नुक्कड़ नाटक से लोगों में जनजागृति लाई जाएगी।

पुलिस महानिरीक्षक (अजमेर रेंज) मालिनी अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक नितिनदीप ब्लग्गन के दिशा निर्देश पर प्रशिक्षु आईपीएस तेजस्विनी गौतम ने आवाज अभियान की परिकल्पना बनाई। अभियान के पहले चरण में महिला उत्पीडऩ को लक्षित किया है।

दूसरे चरण में साम्प्रदायिक सौहार्द और बच्चों में नशा मुक्ति को शामिल किया है। जिला पुलिस की टीम गांव-ढाणियों में महिलाओं पर होने वाले अत्याचार की रोकथाम और महिलाओं की आवाज बनेगी। उनकी पीड़ा को सुनने के साथ समाधान का प्रयास किया जाएगी। जबकि साम्प्रदायिक सौहार्द की दृष्टि से जिले के संवेदनशील व अतिसंवेदनशील स्थानों पर तनाव और हिंसा के दुष्परिणामों से रू-ब-रू कराने के साथ आमजन को पुलिस से जोडऩे के प्रयास किए जाएंगे।

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