मुन्ना बजरंगी की हत्या दोस्ती की 'डील' तो नहीं ?

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (12 जुलाई): बागपत जिला जेल में हुई मुन्ना बजरंगी की हत्या के पीछे पूर्वांचल के दो माफिया डॉन के बीच पनप रही दोस्ती की 'डील' का ऐंगल भी तलाशा जा रहा है। हत्याकांड की विवेचना कर रही पुलिस टीम इस दिशा में भी काम कर रही है। अंडरवर्ल्ड से जुड़े सूत्रों की मानें तो दोनों माफिया के बीच दोस्ती के रास्ते में सिर्फ एक ही गांठ ऐसी थी, जिसे नजरंदाज नहीं किया जा सकता था।

वह गांठ है बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या। माना जा रहा है कि दोस्ती के रास्ते की उस गांठ को खत्म करने के लिए ही मुन्ना बजरंगी की बलि दी गई। मार्च 2013 में एक पुलिस अफसर की हत्या के बाद जरायम की दुनिया के नए समीकरण बने। बताया जा रहा है कि हत्याकांड में नाम आने पर प्रदेश सरकार के एक मंत्री काफी परेशान चल रहे थे। उस वक्त मुख्तार अंसारी ने बैक डोर से उनकी काफी मदद की।

उन्हीं दिनों मुख्तार अंसारी ने मंत्री से कहा था कि वह अब बृजेश सिंह से दुश्मनी खत्म करना चाहते हैं। मंत्री ने दोस्ती करवाने की कमान संभाली और दोनों गैंग के बीच सुलह-समझौतों के लिए लंबी 'बैठकों' का दौर चला। इसी बीच बृजेश सिंह भी माननीय बन गए। जरायम की दुनिया से राजनीति में आने के बाद दोनों 'शांति' चाहते थे। दोनों के विधान भवन आने के बाद इसके रास्ते तलाशे जाने लगे। चर्चा है कि मंत्री की पहल पर दोनों ने एक-दूसरे की दोस्ती कबूल ली। सूत्रों की मानें तो एक बड़ी डील के तहत इन दो धुर विरोधियों ने हाथ मिलाया।