अगर फौजी रास्ता चुना होता तो PoK हमारा होता: एयर चीफ मार्शल

नई दिल्ली (1 सितंबर): इंडियन एयर फोर्स के चीफ अरूप राहा ने कहा कि अगर 1971 में देश ने सैनिक समाधान का रास्ता चुना होता तो पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर आज भारत का हो गया होता। इसी के साथ उन्होंने कहा कि हमने इस युद्ध में अपनी वायु शक्ति का पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं किया था।

अरूप राहा ने कि अगर देश ने सैनिक समाधान का रास्ता चुना होता तो पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भारत का हो गया होता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर हमारे 'गले की हड्डी' बन गया है और भारत ने अपनी सुरक्षा जरूरतों को लेकर 'व्यावहारिक रवैया' नहीं अपनाया।

एयर चीफ मार्शल ने कहा कि भारत की सुरक्षा का माहौल बिगड़ा हुआ है। उनकी राय में मिलिट्री पावर के एक हिस्से के तौर पर वायु शक्ति को प्रतिरोधक फोर्स की तरह काम करने की जरूरत है, ताकि क्षेत्र में किसी संघर्ष को रोका जा सके और अमन व शांति बरकरार रखी जा सके।

उन्होंने कहा, '1947 में जब छापामार फौजों ने 1947 में जब जम्मू और कश्मीर पर हमला किया तो इंडियन एयर फोर्स के ट्रांसपोर्ट विमानों ने भारतीय सैनिकों की मदद की और युद्ध के मैदान तक साजोसामान पहुंचाए। जब सैन्य समाधान से रास्ता निकल रहा था तो हमने ऊंचे नैतिक आदर्श की राह चुन ली। मुझे लगता है कि इस समस्या के शांतिपूर्ण समाधान के लिए हम संयुक्त राष्ट्र चले गए। यह समस्या अभी भी जारी है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर आज भी हमारे गले की हड्डी बना हुआ है।'